थाने में दुर्व्यवहार: तीन निलंबित

दिल्ली पुलिस

दिल्ली में एक महिला ने पुलिस चौकी में अपने ही बेटे के साथ यौन संबंध बनाने पर मजबूर किए जाने और फिर एक पुलिस कॉन्सटेबल पर बलात्कार का आरोप लगाया है.

घटना के 19 दिन बाद दिल्ली पुलिस ने शुरुआती जाँच के आधार पर चौकी के तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है.

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष गिरिजा व्यास ने बताया कि महिला आयोग ने इस मामले की जाँच के लिए एक समिति भी बना दी है.

बच्चों का शोषण

गत 21 मई को इस महिला के आठ और 12 साल के बच्चों पर झुग्गी के पास खड़ी एक कार से चोरी करने का आरोप लगा.

महिला के मुताबिक दोनों बच्चों को दो दिन और एक रात के लिए पुलिस थाने में रखा गया और मारपीट की गई.

भारत के जुविनाइल जस्टिस एक्ट यानी बाल न्याय क़ानून के मुताबिक किसी भी आरोप में पकड़े गए 16 साल से कम उम्र के लड़के या 18 साल से कम उम्र की लड़की को पुलिस थाने में नहीं रखा जा सकता.

उन्हें फौरन एक जुविनाइल बोर्ड के सामने पेश किया जाना ज़रूरी है और तब तक उन्हें किसी बाल सुधार गृह में ही रखा जा सकता है.

पश्चिमी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त शरत अग्रवाल ने बताया, "बच्चों के साथ नियानुसार व्यवहार नहीं हुआ इसलिए हमने एक हेड कॉन्सटेबल और दो कॉन्सटेबल को सस्पेंड किया है, बाकि आरोपों की जांच हो रही है."

बलात्कार का आरोप

गत्ते के डब्बे बनाने की फैक्ट्री में काम करने वाली महिला और उसके पति जब बच्चों को पुलिस चौकी से छुड़ाने आए तो उनके साथ और भी बुरा हुआ.

महिला ने कहा, "मेरे बेटे को कहा गया कि तुम अपनी मां का बलात्कार करो, मैंने मना किया तो पुलिस वाले ने फिर ज़बरदस्ती मेरे साथ ग़लत काम किया."

महिला के मुताबिक इसके 19 दिन बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि बार-बार उसकी झुग्गी में आकर उसे धमकाते थे.

एक स्वयंसेवी संगठन की पहल और कई आला अफ़सरों से शिकायत के बाद मामले की रिपोर्ट दर्ज की गई और आरंभिक जाँच के बाद कार्रवाई हुई.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के मुताबिक पुलिस और सैन्य बलों की हिरासत में होने वाली यातना की शिकायतें पिछले तीन साल में बढ़ी हैं.

महिला आंदोलन से जुड़ी एक कार्यकर्ता के मुताबिक महिलाएं लम्बे समय से पुलिस और सैन्य बलों की हिरासत में यातना का शिकार हुई हैं.

1972 में मथुरा नाम की आदिवासी महिला के साथ महाराष्ट्र के एक थाने में हुए बलात्कार के बाद महिला आंदोलनकारियों के गहन विरोध पर बलात्कार क़ानून में अहम बदलाव भी किए गए थे.

अब बलात्कार की परिभाषा में बदलाव लाकर, उसका दायरा बढ़ाते हुए उसमें कई तरह की यौन हिंसा को शामिल कर, एक नया यौन हिंसा विधेयक संसद में लाने की कोशिश चल रही है.

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