विश्व कप में मिलेंगे मालदा के आम

  • 10 जून 2010
Image caption आम निर्यातक काफ़ी ख़ुश हैं कि भारतीय आम विश्व कप में मिलेगा

दक्षिण अफ़्रीका में फ़ुटबॉल विश्व कप में भारत की टीम भले शामिल न हो, लेकिन इसमें मिठास घोलने के लिए एक भारतीय चीज़ ज़रूर मौजूद रहेगी. और ये चीज़ है पश्चिम बंगाल में मालदा ज़िले का मशहूर लक्ष्मणभोग आम.

आम निर्यातकों की पहल के कारण इस बार विश्व कप के दौरान खिलाड़ियों और फ़ुटबाल प्रेमियों के हाथों में मालदा के मशहूर आम भी नज़र आएंगे.

यानी अब यह आम विश्व कप में नई मिठास घोलेंगे. किसी फ़ुटबॉल विश्व कप के लिए भारतीय आम के निर्यात का यह पहला मौका है.

आमों की सौ मीट्रिक टन की एक खेप पहली बार विश्व कप के लिए दक्षिण अफ़्रीका भेजी गई है. मांग बढ़ने पर तीन और खेप वहां भेजी जाएगी.

स्टेडियम में बिकेंगे

इन आमों को तमाम मैदानों पर फूड कोर्ट के ज़रिए बेचा जाएगा जहां विश्व कप के मैच होने हैं.पश्चिम बंगाल निर्यातक समन्वय समिति के महासचिव उज्जवल साहा कहते हैं कि विश्व कप के मौके पर अफ़्रीका को आमों के निर्यात का ख़्याल अचानक ही आया था.

साहा बताते हैं, "बाद में हमने इस बारे में गंभीरता से सोचना शुरू किया. जनवरी से बातचीत चलने के बाद आखिर मई में यह डील पक्की हो गई."

साहा कहते हैं कि लक्ष्मणभोग आम का स्वाद दक्षिण अफ्रीका के अलावा पूरी दुनिया से वहां जुटने वाले खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के लिए एक नया अनुभव होगा.

लाल रंग का यह आम दूसरे आमों के मुकाबले कुछ कम मीठा है और इसमें रस भी ज़्यादा है.

मालदा मैंगो मर्चेंट्स एसोसिएशन के सचिव सुबोध मिश्र कहते हैं कि लंबे अरसे बाद मध्य पूर्व के अलावा यूरोप, अमरीका और ऑस्ट्रेलिया के बाज़ारों में आम का निर्यात शुरू किया गया है और दक्षिण अफ़्रीका को निर्यात का यह पहला मौका है.

सुबोध मिश्र कहते हैं, “इस निर्यात से आर्थिक रूप से खास फायदा नहीं होगा. इसकी वजह यह है कि आमों के निर्यात का पूरा खर्च निर्यातकों को ही उठाना पड़ा है. लेकिन गर्व की बात ये है कि आम विश्व कप के दौरान स्टेडियम में बिकेंगे. इससे मालदा और बंगाल ही नहीं, पूरे देश का नाम रोशन होगा.”

एसोसिएशन को इस बात का मलाल है कि सरकार की ओर से आम उद्योग को कोई सहायता नहीं मिलती.

फ़ायदा

एसोसिएशन के मुताबिक निर्यात से विदेशी मुद्रा की आय होने के बावजूद केंद्र सरकार कोई सब्सिडी नहीं देती.

मालदा में न तो कोई फूड प्रोसेसिंग यूनिट है और न ही आम के भंडारण के लिए कोल्ड स्टोरेज. सरकार ने मालदा और मुर्शिदाबाद को एक्सपोर्ट प्रमोशन ज़ोन तो घोषित कर दिया है लेकिन आम उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस पहल नहीं की गई है.

पश्चिम बंगाल के कृषि विपणन मंत्री मुर्तज़ा हुसैन ने विश्व कप के लिए मालदा के आमों के निर्यात पर खुशी जताते हुए कहा है कि सरकार इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जल्दी ही ठोस उपाय करेगी. कृषि विपणन मंत्री कहते हैं कि विश्व कप में भारतीय टीम न सही, भारतीय आम तो खेल के मैदान पर मौजूद होंगे.

मालदा के आम उत्पादकों और निर्यातकों को उम्मीद है कि लक्ष्मणभोग आम इस बार दक्षिण अफ्रीका में काफ़ी हिट साबित होंगे. उनका दावा है कि सरकार की ओर से कुछ सहायता मिले तो मालदा के आम पूरी दुनिया को अपनी मिठास में डुबो सकते हैं.

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