पाक में लाखों लोग तालिबान के अधीन: एमनेस्टी

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Image caption पाकिस्तानी सेना और तालिबान के बीच जारी लड़ाई के कारण एक लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं

मानवधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि पाकिस्तान के उत्तर पश्चिम प्रांत में लाखों लोग बिना किसी मानवधिकार के रहते हैं.

संगठन का आरोप है कि क़बायली इलाक़ों में रहने वाले लोगों को तालिबान की ज़्यादतियां झेलनी पड़ती हैं और उन्हें सरकार से कोई मदद नहीं मिलती.

संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि तालिबान ने उन इलाक़ों में बड़े बुज़ुर्गों को मारकर, शिक्षकों और राहत कर्मियों को यातनाएं देकर अपना वर्चस्व क़ायम किया है.

अफ़ग़ानिस्तान से सटे सीमावर्ती इलाक़ों में पाकिस्तानी सेना और तालिबान के बीच जारी लड़ाई में अब तक एक लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं और सिर्फ़ वर्ष 2009 में इस संघर्ष के कारण 1300 लोगों की मौत हो चुकी है.

एमनेस्टी की 130 पन्नों की रिपोर्ट, फ़ाटा और उसके आसपास के इलाक़ों में रहने वाले 300 लोगों के साथ बातचीत पर आधारित है.

तालिबान का नियंत्रण

एमनेस्टी के अंतरिम महासचिव क्लोडियो कॉरडोन के अनुसार लगभग 40 लाख लोग उत्तर पश्चिम पाकिस्तान में तालिबान के नियंत्रण में रह रहे हैं जहां क़ानून का राज नहीं चलता और पाकिस्तानी सरकार ने भी उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ मार्च, 2009 में अपने परिवार के साथ स्वात घाटी को छोड़ कर चले जाने वाले एक शिक्षक ने तालिबान के बारे में कुछ इस तरह बताया,''तालिबान ने मेरे स्कूल पर क़ब्ज़ा कर लिया और बच्चों को ये सिखाने लगे कि अफ़ग़ानिस्तान में लड़ाई कैसे की जाए. उन्होंने लड़कियों को स्कूल से निकाल दिया, पुरुषों को दाढ़ी रखने के आदेश दिए और हर उस आदमी को धमकाने लगे जिन्हें तालिबान पसंद नहीं करते थे.''

उसी शिक्षक ने बताया कि सरकार उनको सुरक्षा देने में पूरी तरह असफल रही है.

शिक्षक ने कहा,'' इतनी बडी़ सेना रखने का क्या मतलब है अगर ये कुछ निर्दयी कट्टरपंथियों से हमारा बचाव नहीं कर सकती.''

एमनेस्टी ने तालिबान पर आरोप लगाया है कि उनके कारण आम नागरिकों के मारे जाने की संभावना बढ़ गई है क्योंकि सुरक्षा बलों से झड़प के दौरान तालिबान आम नागरिकों के बीच घुस जाते है.

संगठन ने पाकिस्तान सरकार से अपील की है कि उस इलाक़े में सैन्य कार्रवाई के दौरान सरकार वहां रहने वाले लोगों के मानवधिकार की हिफ़ाज़त करे.

एमनेस्टी ने सरकार से पाकिस्तानी संविधान में सुधार की भी अपील की है. संविधान के मौजूदा स्वरूप के अंतर्गत फ़ाटा पाकिस्तान के न्यायिक और संसदीय प्रणाली के अंदर नहीं आता.

पाकिस्तान सरकार की तरफ़ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है.

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