कार हादसे में मां की मौत, बच्चे बदहाल

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Image caption दिल्ली की सड़कों पर लगभग रोज़ाना कोई हादसा होता है

पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान दिल्ली के सबसे रईस उम्मीदवार कंवर सिंह तंवर के बेटे की मर्सिडीज़ बेंज़ कार की टक्कर से जिस महिला की मौत हुई, उसके बच्चों की देखभाल करनेवाला अब कोई नहीं बचा है.

महिला का नाम मीनाक्षी है और उसके तीन बच्चे हैं.

नन्ही प्रीति पर घर का बोझ

सबसे बड़ी बेटी आठ साल की प्रीति के कमज़ोर कंधों पर अपने चार साल के छोटे भाई शिवम् और दो साल की बहन साइना का बोझ आ पड़ा है. बच्चे दिल्ली पुलिस के संरक्षण में हैं. उन्हें दिल्ली की एक ग़ैर सरकारी संस्था द्वारा चलाए जा रहे बच्चों के घर में रखा गया है.

फ़िलहाल बच्चों को उनके नाना-मामा की तलाश में बदायूं ले जाया गया है.

प्रीति की मां मीनाक्षी का शव अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के मुर्दाघर में अपनों का इंतज़ार कर रहा है, अपनी अंतिम यात्रा पूरी करने के लिए.

अपने पति से अलग होने के बाद मीनाक्षी अपने तीन बच्चों का भरण पोषण अकेले ही तब तक कर रही थी जब तक कि दिल्ली के एक नामी और रईस राजनेता के बेटे की चमचमाती स्पोर्ट्स मर्सिडीज़ ने उनकी उस टैक्सी को वो करारी टक्कर नहीं मारी थी जिसने उन्हें चिरनिद्रा में सुला दिया.

इस घटना ने मीनाक्षी की बेटी की तक़दीर बदल दी है.

अपनी माँ के क्षत विक्षत हो चुके मृत शरीर के पहचान का ह्रदय विदारक काम भी उसे ही करना पड़ा. और उसपर आलम यह कि इन बच्चों की देखभाल करने वाले रिश्तेदारों की अभी खोज ही हो रही है.

दिल्ली पुलिस उपायुक्त एच जी एस धालीवाल ने बताया, "जब पुलिस बच्चों तक पहुंची तब बच्चों को कुछ पता भी नहीं था और वे कुपोषण के शिकार लग रहे थे. उनकी देखभाल करनेवाला भी कोई नहीं था. बड़ी बेटी को कुछ अंदाज़ा था कि बदायूं में उसके ननिहाल के लोग रहते हैं. बच्चों को वहीं ले जाया गया है."

मीनाक्षी की मौत के बाद पुलिस को उसके बच्चों तक पहुँचने में दो दिन लग गए. तबतक प्रीति ने अपने छोटे भाई बहनों को अपने नन्हें हाथों से चावल और सब्ज़ी बनाकर खिलाया.

लेकिन ज़िंदगी का ये बोझ वो अकेले झेल नही पाएगी, इसलिए पुलिस के साथ अब मामा की तलाश में नन्ही प्रीति अपने छोटे भाई बहनों को लेकर अनजानी गलियों के चक्कर काट रही है.

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