किर्गिस्तान में जातीय हिंसा, 60 मारे गए

किर्गिस्तान

मध्य एशियाई देश किर्गिस्तान के दूसरे सबसे बड़े शहर ओश में किर्गिज़ और उज़्बेक जातियों के सदस्यों के बीच हुई हिंसा में 60 लोग मारे गए हैं, लगभग 650 घायल हुए हैं और हज़ारों लोग जान बचाकर शहर से उज़्बेकिस्तान की सीमा की ओर भाग रहे हैं.

हालात को देखते हुए वहां की अंतरिम सरकार ने आपातकाल की घोषणा कर दी है और कर्फ़्यू लागू कर दिया गया है. पुलिस और सेना को आदेश दिए गए हैं कि वे उपद्रवकारियों को देखते ही गोली चला दें.

फ़िलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि हिंसा क्यों भड़की है.

किर्गिस्तान और उज़्बेकिस्तान की सीमा पर मौजूद बीबीसी संवाददाता रेयहान दिमित्री ने बताया है कि जो लोग अपने घर छोड़ कर पलायन कर रहे हैं उनका कहना है कि उनके घरों को आग लगा दी गई है.

ग़ौरतलब है कि ओश में ही वर्ष 1990 में ऐसे ही जातीय दंगों में सैकड़ों लोग मारे गए थे. रूस और अमरीका दोनों ही देशों के किर्गिस्तान में सैन्य अड्डे हैं.

जून 27 को जनमत संग्रह

ये हिंसक झड़पें गुरुवार देर रात शुरु हुईं. बीबीसी संवाददाता रेयहान दिमित्री के अनुसार शहर के प्रमुख बाज़ारों में आग लगी हुई है और कई इलाक़ों से गोलियाँ चलने की आवाज़ें सुनाई दे रही हैं.

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता रख़माटिलो अख़मेदोव ने बताया है, "कई जगहों पर पूरी की पूरी सड़कों पर आग लगी हुई है. स्थिति बहुत ही ख़राब है. इस हिंसा के रुकने के कोई संकेत नज़र नहीं आ रहे हैं. कई घरों को आग लगा दी गई है."

रिपोर्टों के अनुसार जिन लोगों की संपत्ति को आग लगाई है, उनमें से अधिकतर उज़्बेक हैं.

स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार हिंसा पहले आपसी दुश्मनी वाले गुटों में शुरु हुई.

अंतरिम सरकार की नेता रोज़ा ओटुनबायेवा ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में और हिंसा हो सकती है. अंतरिम सरकार राष्ट्रपति कुरमानबेक बाकियेव के तख़्तापलट के बाद बनी थी.

ये हिंसा 27 जून को होने वाले जनमत संग्रह से पहले हो रही है.

किर्गिस्तान की सीमा चीन और रूस के साथ लगती है और दोनों ही देशों ने शांति की अपील की है.

किर्गिस्तान के राजनीतिक संकट के कारण देश में गृह युद्ध के ख़तरे की अटकलें लगाई जाने लगी हैं.

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