न्यायपालिका ज़िम्मेदार: मोइली

वीरप्पा मोइली
Image caption वीरप्पा मोइली ने पहले कहा था कि एंडरसन पर अब भी मुक़दमा चलाना संभव है

केंद्रीय क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने 1984 के भोपाल गैस त्रासदी के मामले में कांग्रेस की सरकारों का बचाव करते हुए कहा है कि सरकारों ने अपनी ज़िम्मेदारी निभाई.

उन्होंने न्याय मिलने में हुई देरी और दोषी लोगों को कम सज़ा मिलने के बारे में कहा कि इसके लिए सरकार नहीं बल्कि न्यायपालिका ज़िम्मेदार है.

वीरप्पा मोइली ने कहा कि भोपाल की तरह की त्रासदी के लिए भारत में पर्याप्त क़ानूनी प्रावधानों का अभाव है और उनका मंत्रालय अब इस दिशा में काम कर रहा है.

वीरप्पा मोइली का बयान ऐसे समय में आया है जब मध्यप्रदेश में उस समय पदस्थ विभिन्न अधिकारी यह बयान दे रहे हैं कि मध्यप्रदेश की तत्कालीन अर्जुन सिंह सरकार ने यूनियन कार्बाइड के तत्कालीन प्रमुख वॉरेन एंडरसन को भारत से अमरीका निकल भागने में मदद की थी.

जबकि उस सरकार में मंत्री रहे, वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा है कि उसमें राज्य नहीं बल्कि केंद्र सरकार की भूमिका थी.

चूंकि उस समय केंद्र में भी राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी, इसलिए इस पर विवाद खड़ा हो गया है.

इस बीच अमरीका ने कहा है कि यदि भारत सरकार वॉरन एंडरसन के प्रत्यर्पण के बारे में कोई अनुरोध करती है तो अमरीका ध्यानपूर्ण उस अनुरोध का आकलन करेगा.

'कांग्रेस में विभाजन नहीं'

वीरप्पा मोइली ने इस बात से इनकार किया कि भोपाल गैस त्रासदी के मामले में कांग्रेस में कोई विभाजन है. उन्होंने कहा, "कांग्रेस के नेताओं ने अपनी राय ज़ाहिर की है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर विभाजित है."

इस सवाल पर कि एंडरसन को अमरीका जाने देने में मध्यप्रदेश सरकार की भूमिका थी या केंद्र सरकार की, क्या पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह को अपनी चुप्पी नहीं तोड़नी चाहिए, मोइली ने कहा कि वे यह फ़ैसला अर्जुन सिंह पर ही छोड़ते हैं.

भोपाल गैस त्रासदी के पूरे विवाद पर अर्जुन सिंह ने चुप्पी साध रखी है और अब तक वे मीडिया से बात करने से इनकार कर रहे हैं.

अमरीकी जाँच एजेंसी (सीआईए) के दस्तावेज़ों के हवाले से आ रही इन ख़बरों के बारे में कि एंडरसन को भारत से अमरीका आने में राजीव गांधी सरकार ने मदद की थी वीरप्पा मोइली ने कहा, "अमरीकी दस्तावेज़ों में जो कहा गया है उसके आधार पर यह सवाल करना ठीक नहीं है कि कौन सी सरकार और कौन व्यक्ति ज़िम्मेदार था, उसमें कहा गया है कि फलाँ सरकार जिसका नेतृत्व फलाँ व्यक्ति कर रहा था."

खेद

Image caption यूनियन कार्बाइड के इसी संयंत्र से दो दिसंबर, 1984 की रात गैस रिसी थी

वीरप्पा मोइली ने कहा कि भोपाल त्रासदी के मामले में न्याय मिलने में जो देरी हुई और जिस तरह से दोषी लोगों को कम सज़ा मिली उसके लिए सरकार नहीं बल्की न्यायपालिका ज़िम्मेदार है.

उनका कहना था कि सीबीआई ने उनके ख़िलाफ़ 304 का जुर्म दर्ज किया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने इसे घटाकर 304 ए कर दिया जो किसी कार या ट्रक दुर्घटना में लगने वाली धारा है.

उन्होंने कहा, "कई साल मामला चला, पहले मुआवज़े का मामला चलता रहा फिर नए सिरे से आरोप तय किए गए. यह दुर्भाग्यजनक है और इसका हमें खेद है."

केंद्रीय क़ानून मंत्री का कहना था कि इस फ़ैसले के बाद दो बातों पर उनका मंत्रालय विचार कर रहा है, एक तो यह कि ऐसे मामलों को जल्दी निपटाने का प्रावधान करना चाहिए और दूसरा व्यापक तबाही वाले मामलों को निपटाने के लिए अलग क़ानून बनाना होगा.

उनका कहना था इस समय संविधान में क्षतिपूर्ति क़ानून व्यवस्थित रुप में नहीं है और उसे ठीक करने की ज़रुरत है.

उन्होंने कहा, "क्षतिपूर्ति क़ानून में संशोधन से ही तय हो सकता है कि किसी व्यापक तबाही के लिए किसने किस स्तर पर ग़लती की है और इसी के आधार पर किसी दुर्घटना का त्रासदी होना तय किया जा सकता है."

भोपाल गैस त्रासदी में कम से कम 1500 लोगों की मौत हुई थी और लाखों लोग प्रभावित हुए थे. लेकिन इस पूरे मामले में अदालत में पिछले सप्ताह सात लोगों को दो-दो साल की सज़ा सुनाई है.

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