मौत का सौदागर कौन है : मोदी

  • 14 जून 2010
भाजपा के वरिष्ठ नेता( फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption भाजपा ने कांग्रेस को निशाना बनाया

भारतीय जनता पार्टी ने पटना में रविवार को संपन्न अपनी कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक और रैली के ज़रिए मुख्य रूप से कांग्रेस नीत केंद्र सरकार पर आरोपों की बौछार की.

पार्टी कार्यकारिणी द्वारा पारित प्रस्तावों में कहा गया कि केंद्र सरकार देश में बढ़ते आतंकवाद, माओवाद, महंगाई और भ्रष्टाचार की पोषक बन गई है.

भारत के संघीय ढांचे को छिन्न-भिन्न करने,वोट की राजनीति के तहत राष्ट्र हित को ताक पर रखने और अपने देश की स्वीकृत विदेश नीति को कमज़ोर करने के भी आरोप मनमोहन सरकार पर लगाये गये.

लेकिन भाजपा के इस पूरे आयोजन का जो सबसे चर्चित प्रसंग उभरा, वो गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच छूआछूत जैसे रिश्ते वाला कोई राजनीतिक खेल- सा दिखने लगा है.

नीतीश कुमार को लगता है कि भाजपा से सत्ता साझीदारी वाला नाता रखते हुए भी नरेन्द्र मोदी से दूरी दिखाकर मुस्लिम समाज का कुछ समर्थन हासिल किया जा सकता है.

लेकिन नरेन्द्र मोदी के साथ नीतीश कुमार के मिले हुए हाथ वाला चित्र जब इस मौक़े पर एक विज्ञापन की शक्ल में छप गया तो नीतीश भड़क गये और क़ानूनी कार्रवाई तक की धमकी दे डाली.

इस कारण भाजपा-जदयू गठबंधन में आई खटास की बात ऐसे मौक़े पर ख़बर बन गई जब भाजपा के तमाम दिग्गजों का पटना में जमावड़ा था. बात इतनी बिगड़ गई कि नीतीश कुमार ने भाजपा नेताओं के लिए निर्धारित रात्रि-भोज को भी रद्द कर दिया .

इसपर भाजपा के किसी और नेता ने तो नहीं लेकिन लालकृष्ण अडवाणी ने रैली-मंच से ये कह दिया कि नीतीश जी को भाजपा के सहयोग से मिली सत्ता की बात भूलनी नहीं चाहिए. उन्होंने ये भी कहा कि हाथ मिले हुए चित्र तो परस्पर स्नेह दिखाते हैं, इसलिए इसे गठबंधन में गाँठ मानना सही नहीं है.

रैली में नरेंद्र मोदी के तीखे तेवर और तल्ख़ अंदाज़ वाले भाषण पर ख़ूब तालियाँ बजीं. उन्होंने कहा,'' भोपाल गैस त्रासदी में हजारों लोगों की जान लेने वाले को बचाने वाला कौन है, इसका जवाब मैडम सोनिया गांधी अब खुलकर क्यों नहीं दे रहीं हैं ? मौत का सौदागर कौन है, इस सवाल का जवाब अब देश को सोनिया गांधी से चाहिए.''

नरेंद्र मोदी ने रैली में लोगों से ये आवाज़ बुलंद करवाई कि निर्दोष का क़त्ल करने वाले माओवादियों और आतंकवादियों को उन्हीं की भाषा में यानी ईंट का जवाब पत्थर से देना चाहिए और क़साब जैसे क़ातिल को एक महीने के भीतर फांसी पर लटकाना चाहिए.

भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने भी कांग्रेसी हुकूमत के ख़िलाफ़ कड़े शब्द-प्रहार किये. उन्होंने कहा,'' जबतक केंद्र में कांग्रेसी सरकार रहेगी तबतक ना तो माओवाद और ना ही आतंकवाद या महंगाई से इस देश को मुक्ति मिलेगी.''

कुल मिलाकर भाजपा की ये बैठक और रैली बिहार में इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र पार्टी संगठन को सक्रिय बनाने के मक़सद से आयोजित हुई. लेकिन नीतीश कुमार की वजह से इस मक़सद की धार थोड़ी कुंद ज़रूर हो गयी.

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