भारतीय रुपए के चिन्ह पर विचार

Image caption विश्लेषकों का कहना है अपनी मुद्रा का अलग चिन्ह बढ़ते आर्थिक प्रभाव का प्रतीक है.

भारतीय रुपया बहुत जल्द डॉलर, पाउंड जैसी उन गिनी चुनी मुद्राओं में शामिल हो जाएगा जिनके पास अपना अलग चिन्ह है.

केंद्रीय मंत्रिमंडल इस पर विचार कर रहा है और संभावना है कि जल्दी ही फ़ैसला लिया जाएगा.

दुनिया की प्रभावशाली मुद्राओं जैसे डॉलर, यूरो, पाउंड और जापानी येन का अपना प्रतीक चिन्ह है.

भारतीय वित्त मंत्रालय ने इसके लिए पांच चिन्ह छांट लिए हैं लेकिन अभी अंतिम चिन्ह पर फ़ैसला होना बाकी है.

विश्लेषकों का कहना है कि ये दुनिया के आर्थिक मानचित्र पर भारत के बढ़ते प्रभाव और उससे उपजे आत्मविश्वास को दर्शाता है.

जिन पांच लोगों की ओर से दिए गए प्रतीक चिन्ह चुने गए हैं उनके नाम हैं हितेश पद्माशाली, शाहरूख़ जे ईरानी, डी उदय कुमार, नंदिता कोरिया मेहरोत्रा और शिबिन के के.

अभी तक रुपए को आरएस (Rs) या आरई (Re) या आईएनआर (INR) लिखकर दर्शाया जाता रहा है. पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका में भी रुपए के लिए इन्हीं अक्षरों का इस्तेमाल होता है.

वित्त मंत्रालय एक ऐसा चिन्ह चाहती थी जिसमें भारत के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मूल्यों की झलक हो और उन्होंने आम जनता से अप्रैल में इसके लिए सुझाव मांगा था.

इसके लिए सात जजों की एक पैनल की नियुक्ति हुई जिसमें रिज़र्व बैंक के के अलावा नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ डिज़ाइन, ललित कला अकादमी, जे जे स्कूल ऑफ़ आर्ट्स और गांधी नैशनल सेंटर के प्रतिनिधि शामिल थे.

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