पुणे विस्फोट में मुख्य संदिग्ध को ज़मानत

  • 16 जून 2010
विस्फोट के बाद
Image caption विस्फोट में घायल कई लोगों की मौत बाद में हुई

महाराष्ट्र की आतंकवाद विरोधी शाखा (एटीएस) को एक झटका तब लगा जब मुंबई की एक अदालत ने गिरफ़्तार किए गए अब्दुल समद को ये कहते हुए ज़मानत दे दी कि उसके ख़िलाफ़ कोई सुबूत नहीं हैं.

समद को 25 मई को पुणे में जर्मन बेकरी धमाके के सिलसिले में मंगलोर से गिरफ़्तार किया गया था.

दरअसल समद की गिरफ्तारी के बाद गृहमंत्री पी चिदंबरम का एक बयान सामने आया था जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र की आतंकवाद विरोधी शाखा, पुणे पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों को बधाई दी थी कि उन्होंने 13 फ़रवरी को हुए पुणे धमाके के कथित प्रमुख संदिग्ध अब्दुल समद को घटना के सौ दिनों के अंदर ही पकड़ लिया.

लेकिन लोगों को आश्चर्य तब हुआ जब पुलिस ने समद की गिरफ़्तारी एक दूसरे मामले में दिखाई.

दरअसल पुलिस की माने तो समद को पिछले साल हथियारों की आपूर्ति के एक दूसरे मामले में पकड़ा गया था. लेकिन जब अधिकारियों से चिंदबरम के बयान के बारे में पूछा जाता तो वो चुप्पी साध लेते थे. इस मामले में एटीएस की ओर से कोई बयान सामने नहीं आया है.

मंगलवार को सत्र न्यायालय के सामने समद ने दलील दी कि उसका वर्ष 2009 में हथियार आपूर्ति के मामले से कोई ताल्लुक नहीं है और इस बारे में पुलिस के पास कोई सुबूत भी नही है. अदालत ने समद की दलील स्वीकारते हुए उसे ज़मानत पर रिहा कर दिया.

अदालत ने समद से कहा कि अगर जाँच अधिकारी को उनकी ज़रूरत पड़ेगी तो उन्हें हाज़िर होना होगा.

समद के वकील मोबिन सोलकर की माने तो हथियार आपूर्ति के मामले की जाँच में समद का पहले कभी नाम ही नहीं आया था.

समद की गिरफ़्तारी, उस पर गृहमंत्री के बयान और फिर पुलिस का समद को किसी और मामले में गिरफ़्तार करना, इसे सुरक्षा एजेंसियों में तालमेल की कमी का एक और उदाहरण माना जा रहा है.

ये भी कहा जा रहा है कि गृह मंत्रालय और महाराष्ट्र पुलिस के बीच संवाद की कमी थी, तभी गृह मंत्री का ऐसा बयान सामने आया.

अदालत के समद को ज़मानत दिए जाने को पुलिस के लिए धक्का माना जा रहा है. लेकिन सवाल फिर वही कि आख़िर समद की गिरफ़्तारी क्यों हुई.

इस पर मोबिन कहते हैं,''ये जवाब तो आपको एटीएस ही दे पाएगी कि समद को क्यों गिरफ़्तार किया गया,लेकिन अभी तक तो बस यही रेकॉर्ड पर है कि एटीएस शक कर रही थी कि समद हथियारों की आपूर्ति के मामले में शामिल है क्योंकि जाँच के दौरान अब्दुल नाम के एक व्यक्ति का नाम सामने आया था. उन्होंने अब्दुल समद को वही अब्दुल समझ कर कार्रवाई की.''

गौर करने वाली बात ये है कि एटीएस की ओर से कभी भी नहीं कहा गया कि समद को पुणे मामले में गिरफ़्तार किया गया था या फिर उस पर शक है.

हालांकि चिदंबरम ने अपने एक और बयान में ज़ोर देकर कहा कि गिरफ़्तार किए गए व्यक्ति पर सिर्फ़ शक है और इस जानकारी को लेकर सावधानी बरती जाए.

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