भोपाल गैस त्रासदी पर मंत्री समूह की बैठक

भोपाल गैस त्रासदी मामले में पुनर्गठित मंत्री समूह (जीओएम) की बैठक शुक्रवार को होगी. इसकी अध्यक्षता गृह मंत्री पी चिदंबरम करेंगे.

इधर भोपाल गैस त्रासदी में अदालत के फ़ैसले में सुनाई गई सज़ा को नाकाफ़ी मानते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने अपील करने का निर्णय किया है.

गुरुवार को प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने पत्रकारों को बताया कि शुक्रवार को होने वाली बैठक में भोपाल कांड पर बातचीत के लिए दो घंटे का समय निर्धारित किया गया है और इस दौरान कई मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. उन्होंने बताया कि जिन पीड़ितों को उचित राहत नही मिल पाई है, उनके बारे में विस्तार से चर्चा की जाएगी.

उल्लेखनीय है कि गैस त्रासदी से जुड़े मामले पर विचार विमर्श के लिए प्रधानमंत्री ने गृह मंत्री पी चिदंबरम की अध्यक्षता में मंत्री समूह का गठन सात जून को किया था.

इसमें केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आज़ाद, वीरप्पा मोइली, एस जयपाल रेड्डी, कमलनाथ, शैलजा, एमके अड़ागिरी, पृथ्वीराज चव्हाण और जयराम रमेश शामिल हैं.

मध्य प्रदेश अपील करेगा

इसके पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने निर्देश दिया था कि पुनर्गठित मंत्री समूह 10 दिनों के भीतर कैबिनेट को भोपाल मामले पर अपनी रिपोर्ट सौंपे.

मंत्री समूह से कहा गया है कि वो ये बताए कि भोपाल की निचली अदालत के फ़ैसले के संदर्भ में सरकार के पास क्या विकल्प हैं जिससे पीड़ितों को राहत और पुनर्वास जैसे मु्द्दों पर ध्यान दिया जा सके.

इसी महीने भोपाल की निचली अदालत ने 26 साल पुराने भोपाल गैस कांड पर फ़ैसला सुनाते हुए सात दोषियों को केवल दो-दो साल की सज़ा सुनाई थी और उसके बाद उन्हें ज़मानत भी मिल गई थी.

साथ ही भोपाल गैस कांड में यूनियन कार्बाइड के तत्कालीन प्रमुख वॉरेन एंडरसन फ़रार हैं.

इधर भोपाल गैस त्रासदी में अदालत के फ़ैसले में सुनाई गई सज़ा को नाकाफ़ी मानते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने अपील करने का निर्णय किया है.

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फ़ैसले के विश्लेषण के लिए पांच सदस्यीय विधि विशेषज्ञों की समिति गठित की थी.

इस समिति ने 12 सिफ़ारिशों के साथ गुरुवार को अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी.

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