मध्य प्रदेश सरकार अपील करेगी

  • 18 जून 2010

भोपाल गैस त्रासदी में अदालत के फ़ैसले में सुनाई गई सज़ा को नाकाफ़ी मानते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने अपील करने का निर्णय लिया है.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फ़ैसले के विश्लेषण के लिए पांच सदस्यीय विधि विशेषज्ञों की समिति गठित की थी.

इस समिति ने 12 सिफ़ारिशों के साथ गुरुवार को अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी.

राज्य के क़ानून मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बीबीसी से बातचीत में जानकारी दी कि समिति ने सिफ़ारिश की है कि सात जून के निर्णय के विरुद्ध सत्र न्यायालय में अपील दायर की जाए क्योंकि सुनाई गई सज़ा अपर्याप्त है.

उनका कहना था कि राज्य सरकार केंद्र सरकार और सीबीआई से भी अनुरोध करेगी कि वे भी सत्र न्यायालय में अपील करें.

निरोत्तम मिश्रा ने बताया कि राज्य सरकार सात जून के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सत्र न्यायालय में एक पुनरीक्षण याचिका दायर कर वैधानिक त्रुटियों को सुधारने का अनुरोध करेगी.

साथ ही राज्य सरकार केंद्र और सीबीआई से अनुरोध करेगी कि वह फ़रार अभियुक्तों के संबंध में एक पूरक पत्र दायर करें.

उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार एक समिति का गठन कर उन परिस्थितियों की भी जांच करेगी जिससे वॉरेन एंडरसन को गिरफ़्तार करने के बाद रिहा करने की वजह का पता चल सके.

राज्य सरकार उन अधिकारियों की ज़िम्मेदारी भी तय करेगी जो अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहे.

निरोत्तम मिश्रा ने बताया कि समिति की सिफ़ारिशों पर प्रभावी ढंग से कार्रवाई करने के लिए मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन कर दिया है.

ग़ौरतलब है कि भोपाल की निचली अदालत ने सात जून को गैस त्रासदी मामले में सभी सात दोषियों को दो-दो साल की सज़ा सुनाई थी और कुछ ही देर बाद उन्हें ज़मानत भी मिल गई थी.

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