मणिपुर की नाकेबंदी फ़िलहाल ख़त्म

मणिपुर में नाकेबंदी की फ़ाइल फ़ोटो

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर की पिछले दो महीने से नगा छात्र संगठनों द्वारा की जा रही आर्थिक नाकेबंदी फ़िलहाल पूरी तरह से ख़त्म हो गई है. इस दौरान खाद्य पदार्थों की कीमत लगभग तीन से चार गुना बढ़ गई थी.

मंगलवार को एक प्रमुख संगठन नगा स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन (एनएसएफ़) ने बीबीसी को बताया था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात के बाद उसने नाकेबादी ख़त्म करने का फ़ैसला किया है.

लेकिन दो अन्य संगठनों - ऑल नगा स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ़ मणिपुर (एएनएसएएम) और यूनाइटेड नगा काउंसिल ऑफ़ मणिपुर (यूएनसीएम) ने कहा था कि वे तब तक आर्थिक नाकेबंदी ख़त्म नहीं करेंगे जब तक सरकार सुरक्षाबलों को राज्य के नगा आबादी वाले इलाक़ों से हटाती नहीं है.

ये संगठन अपने दो नेताओं के ख़िलाफ़ जारी गिरफ़्तारी वॉरंट को वापस लिए जाने की माँग भी कर रहे थे.

लेकिन अब इन सभी संगठनों ने 12 अप्रैल को शुरु की गई आर्थिक नाकेबंदी को ख़त्म करने का फ़ैसला किया है. लेकिन इन संगठनों ने धमकी दी है कि यदि इनकी माँगे मानी नहीं जातीं तो ये फिर नाकेबंदी शुरु कर सकते हैं.

स्वायत्त परिषदों पर विवाद

ये संगठन पाँच पहाड़ी ज़िलों में स्वायत्तशासित परिषदों में नए नियमों के तहत चुनाव करवाए जाने का विरोध कर रहे थे. उनका कहना है कि नए नियमों से परिषदों की वित्तीय अधिकारों में कटौती की जा रही है.

इन पाँचों ज़िलों में ज़िला परिषदों के चुनाव हो चुके हैं, हालांकि नगा बहुल इलाक़ों में मतदान का प्रतिशत काफ़ी कम रहा.

ऑल नगा स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ़ मणिपुर (एएनएसएएम) और यूनाइटेड नगा काउंसिल ऑफ़ मणिपुर (यूएनसीएम) चाहते हैं कि मणिपुर सरकार इन संगठनों के प्रमुखों डेविड कोरो और सैमसन रेमई के ख़िलाफ़ जारी गिरफ़्तारी वारंट को भी वापस ले.

मणिपुर की सरकार के प्रवक्ता और मंत्री एन बिरेन सिंह ने इन संगठनों के वित्तीय अधिकारों और आदिवासियों के अधिकारों में कटौती के आरोपों का खंडन किया है.

उनका दावा है कि नगा विधायकों ने भी इन नियमों के बनाए जाने के दौरान इसका विरोध नहीं किया था चाहे ये संगठन इन विधायकों का समर्थन करते हैं.

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