बिहार: गठबंधन में पड़ी गाँठ

नीतीश कुमार और सुशील मोदी
Image caption पिछला चुनाव दोनों पार्टी के नेताओं ने इस अंदाज़ में लड़ा था

बिहार में सत्ता के साझीदार दोनों दल यानी भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड के बीच तकरार बढ़ जाने से वहाँ गठबंधन सरकार पर एक बड़ा संकट दिखने लगा है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 'विश्वास यात्रा' से जब भाजपा ने खुद को अलग कर लिया तो मुख्यमंत्री ने पटना सिटी में रविवार के अपने इस यात्रा कार्यक्रम को रद्द कर दिया.

मतलब ये कि भाजपा और जदयू के नेताओं का अब किसी सार्वजानिक मंच पर एक साथ आना भी मुश्किल होता जा रहा है.

नीतीश सरकार में शामिल भाजपा के कुछ मंत्रियों ओर नेताओं के जैसे तीखे बयान मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ आने लगे हैं, उस से लगता है कि अब इन दोनों दलों में आर-पार की लड़ाई हो कर रहेगी.

कड़ी प्रतिक्रिया

नीतीश-नरेन्द्र मोदी विवाद की वजह से स्थिति यहाँ तक बिगड़ चुकी है कि पटना जिले के पालीगंज इलाक़े में ' विश्वास यात्रा ' के दौरान उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को नीतीश कुमार के साथ रहना था लेकिन मोदी वहाँ नहीं गये.

नतीजा हुआ कि भाजपा नेता और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नन्द किशोर यादव के क्षेत्र पटना सिटी में रविवार के 'विश्वास यात्रा' कार्यक्रम को मुख्यमंत्री ने रद्द कर दिया.

नीतीश सरकार में भाजपा कोटे के दो मंत्री अश्विनी कुमार चौबे और गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री के कथित अपमानजनक रवैये पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. अश्विनी चौबे कहते हैं, "कोसी आपदा राहत मद के पांच करोड़ रूपए गुजरात सरकार को वापस करने से पहले मुख्यमंत्री ने अपने किसी सहयोगी भाजपाई मंत्री से कोई राय तक लेना ज़रूरी नहीं समझा. हम लोग स्वाभिमान बेचकर या अपमान सहकर किसी गठबंधन से चिपके रहना नहीं चाहते और भाजपा चींटी नहीं है कि कोई उसे रगड़ सके. ये नौटंकी बंद होनी चाहिए."

जबकि दूसरे नेता गिरिराज सिंह ने कहा, "गठबंधन धर्म के ख़िलाफ़ मुख्यमंत्री जो कुछ करने या कहने लगे हैं, उससे तो यही लगता है कि शायद वो भाजपा के 55 विधायकों को दरकिनार करके अपने जदयू के 81 विधायकों के बूते ही सरकार चला लेना चाहते हैं. नरेन्द्र भाई मोदी बिहार की जनता को नमन करते हैं लेकिन हमारे मुख्यमंत्री गुजरात की जनता का अपमान करने जैसा क़दम उठा लेते हैं."

लालू का सवाल

ज़ाहिर है कि जब नीतीश सरकार में शामिल पार्टी ही नीतीश कुमार के किसी व्यवहार पर सवाल उठा रही हो तब विपक्ष का और भी हमलावर हो जाना स्वाभाविक है. राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने नीतीश कुमार को आदतन धोखेबाज़ बताते हुए कहा, "ऐसा कोई सगा नहीं, जिसे नीतीश ने ठगा नहीं. जिस कोसी क्षेत्र के लोगों ने नीतीश कुमार को गद्दी पर बिठाने लायक समर्थन दिया, उसी कोसी बाढ़ पीड़ितों की राहत वाली सहायता-राशि को नीतीश कुमार ने अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक नौटंकी के तहत गुजरात सरकार को वापस कर दिया."

लालू प्रसाद ने पूछा है, "मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष में गुजरात का भेजा हुआ पैसा बिना खर्च हुए दो साल तक कैसे पड़ा रह गया? तो क्या इसका ये मतलब नहीं है कि आपदा राहत मद में मिले करोड़ों रूपए दबा कर रखे गए और बाढ़-पीड़ितों को कहा गया कि केंद्र सरकार से राहत मद में माँगी गई राशि नहीं मिली, इसलिए पुनर्वास का काम नहीं हुआ."

जनता दल (यू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवानन्द तिवारी ने इन तमाम आरोपों के जवाब में कहा है कि भाजपा के नरेंद्र मोदी ब्रांड से कभी भी जदयू की सेकुलर सोच मेल नहीं खा सकती और गठबंधन धर्म पर उस चिढ़ाने वाले विज्ञापन के ज़रिए हमला करवाया गया, जो नीतीश कुमार को नागवार गुज़रा.

जो भी हो, अब लगता यही है कि बिहार में भाजपा-जदयू गठबंधन सरकार के दोनों घटक दल यहाँ तीन-चार महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही अलग-अलग रास्ता अपना लेने की रणनीति बनाने में जुट गये हैं.

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