बिहार के गठबंधन पर भाजपा में मंथन

  • 22 जून 2010
नितिन गडकरी
Image caption बिहार में गठबंधन जारी रखने का अहम निर्णय अब आलाकमान को ही लेना है

बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गठबंधन में पड़ी गाँठ के बाद अब भाजपा नेता इस विचार विमर्श में लगे हुए हैं कि इस गठबंधन में रहना चाहिए या नहीं.

भाजपा के बिहार इकाई के अध्यक्ष सीपी ठाकुर दिल्ली में हैं और बिहार के दूसरे नेताओं को भी दिल्ली बुलवाया गया है. मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी के निवास पर एक बैठक बुलाई गई है जिसमें इस सवाल पर विचार किया जाएगा.

राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि गठबंधन गंभीर संकट के दौर से गुज़र रहा है. लेकिन सीपी ठाकुर ने बीबीसी से कहा, "मसला गंभीर तो नहीं है लेकिन इस पर विचार करना ज़रुरी लग रहा है."

बिहार के नेता सत्तारूढ़ गठबंधन से अलग तो नहीं होना चाहते लेकिन उनका कहना है कि आत्मसम्मान खोकर भी वे गठबंधन में नहीं रहना चाहते.

राज्य के भाजपा नेता इस बात के लिए भी तैयार हैं कि अगर ज़रूरत पड़ी तो वे चुनाव में अकेले भी जा सकते हैं.

बिहार में इसी साल अक्तूबर में चुनाव होने की संभावना है और अटकलें लगाई जा रही हैं कि नीतीश कुमार इन चुनावों में अकेले जाने की तैयारी कर रहे हैं.

बीबीसी के बिहार संवाददाता के अनुसार नीतीश कुमार ने सोमवार को पत्रकारों से कहा, "टेंशन मत लीजिए, रिलैक्स कीजिए."

अहम बैठक

सीपी ठाकुर ने सोमवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाक़ात की.

हालांकि उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी से हुई चर्चा का विवरण नहीं दिया लेकिन उन्होंने बताया कि उन्हें पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी से मिलकर इस विषय में चर्चा करने के निर्देश दिए गए हैं.

इस बीच नितिन गडकरी ने भी लालकृष्ण आडवाणी से मुलाक़ात की और उसके बाद उन्होंने बिहार में पार्टी के प्रमुख सीपी ठाकुर और भागलपुर से पार्टी के सांसद और प्रवक्ता शहनवाज़ हुसैन से भी चर्चा की.

सीपी ठाकुर ने बीबीसी को बताया, "अभी कोई चर्चा नहीं हुई है. मंगलवार को रात नौ बजे बिहार के सभी नेता पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी के निवास पर एकत्रित होंगे और वहीं इस विषय में विस्तार से चर्चा होगी."

जदयू के रवैये पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, "शरद जी का बयान तो ठीक आ रहा है लेकिन दूसरे लोगों ने बहुत कुछ कहा है."

यह पूछे जाने पर कि जदयू के अकेले चुनाव में जाने की अटकलें लग रही हैं, उन्होंने कहा, "अभी हम नहीं बता सकते कि जदयू कितना पीछे हटना चाहते हैं."

लेकिन समाचार एजेंसी पीटीआई से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, "अगर हमें बाध्य किया गया तो हम अकेले चुनाव में जाने के लिए तैयार हैं लेकिन हम चाहते हैं कि यह गठबंधन जारी रहे."

ख़बरें हैं कि बिहार के दूसरे नेता, जिसमें उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी शामिल हैं, नहीं चाहते कि जदयू से पिछले 15 सालों से चला आ रहा गठबंधन ख़त्म किया जाए.

विवाद

Image caption पंद्रह साल पुराना गठबंधन संकट के दौर से गुज़र रहा है

जदयू और भाजपा गठबंधन में गाँठ पड़ने की शुरुआत उस समय हुई जब भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के समय अख़बारों में नीतीश कुमार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हाथ में हाथ थामे एक तस्वीर विज्ञापन की तरह अख़बारों में छपी.

इस विज्ञापन में गुजरात सरकार की ओर से कोसी के बाढ़ पीड़ितों को दी गई सहायता का ज़िक्र किया गया था.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस विज्ञापन पर नाराज़गी ज़ाहिर की और कहा कि सहायता को इस तरह से प्रचारित करना ठीक नहीं है.

इसके बाद आरोप-प्रत्यारोपों के बीच नीतीश कुमार ने गुजरात सरकार को बाढ़ पीड़ितों को दिए गए पाँच करोड़ वापस लौटा दिए. उनके इस क़दम को जदयू के प्रमुख शरद यादव ने भी खेदजनक बताया है.

नीतीश कुमार के इस क़दम की भाजपा में भी तीखी प्रतिक्रिया हुई और रविवार को सुशील मोदी और भाजपा के कोटे से सरकार में शामिल दो मंत्रियों ने नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ न केवल बयान दिए बल्कि वे नीतीश के 'विश्वास यात्रा' में शामिल नहीं हुए.

संवाददाता मानते हैं कि ऐन चुनाव से पहले नीतीश कुमार राज्य के मुसलमान मतदाताओं को रिझाने के लिए भाजपा से एक दूरी दिखाना चाहते हैं.

कहा तो यह भी जा रहा है कि जदयू इस बार एनडीए के रुप में नहीं बल्कि भाजपा से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ना चाहता है.

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