कश्मीर में हड़ताल, कई क्षेत्रों में कर्फ़्यू

  • 21 जून 2010
कश्मीर प्रदर्शन (फ़ाइल फ़ोटो)

भारत प्रशासित कश्मीर में सोमवार को हड़ताल के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है. हड़ताल को देखते हुए प्रशासन ने श्रीनगर के अधिकांश हिस्सों में कर्फ़्यू लगा दिया है.

ये हड़ताल रविवार को पुलिस फ़ायरिंग में एक युवक की मौत के विरोध में आयोजित की गई है.

इस हड़ताल के कारण दुकानें, बैंक और शैक्षिक संस्थान बंद हैं. साथ ही यातायात भी प्रभावित हुआ है और इक्का दुक्का वाहन ही चल रहे हैं. सरकारी दफ़्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति भी कम है.

स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ इस बात से लगाया जा सकता है कि लोगों ने अख़बारों में शादी की दावतें स्थगित कर दी हैं और अख़बारों में इसकी सूचना दी गई है.

दरअसल पिछले सप्ताह श्रीनगर में एक प्रदर्शन के दौरान मोहम्मद रफ़ीक बांगरु नामक युवक की सुरक्षाबलों की पिटाई से मौत हो गई थी.

बांगरु को जब रविवार सुबह दफ़नाने के लिए ले जाया जा रहा था तो उसके जनाज़े में हज़ारों की संख्या में लोग जुट गए.

ये लोग जब पुलिस और सीआरपीएफ की चौकियों के पास से गुज़रे तो भीड़ में से कुछ लोगों ने चौकियों पर पथराव करना शुरु कर दिया.

गोलीबारी

इसके जवाब में पुलिस और सीआरपीएफ ने गोलियां चलाईं जिसमें जावेद नामक युवक की की मौत हो गई और चार अन्य लोग घायल हो गए.

इसके विरोध में सोमवार को विभिन्न पृथकतावादी गुटों ने हड़ताल का आह्नान किया. यहाँ तक कि राजनीति दलों ने भी पुलिस पर ज्यादती का आरोप लगाया है.

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की महबूबा मुफ़्ती का कहना है,''सरकार ने अपने ही लोगों के ख़िलाफ़ जंग छेड़ दी है.''

नेशनल कॉन्फ्रेंस के आठ विधायकों ने भी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से रविवार शाम मुलाक़ात की और स्थिति पर निराशा व्यक्त की.

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने लोगों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है.

मुख्यमंत्री का कहना था,''किसी भी निर्दोष नागरिक की मौत चिंता का विषय है और ये किसी भी ज़िम्मेदार सरकार के लिए दुखद है.''

सरकार ने श्रीनगर के पुलिस प्रमुख रियाज़ बेदर का तत्काल तबादला कर दिया है.

हालांकि पुलिस प्रवक्ता का कहना है कि सुरक्षाबलों ने आत्मरक्षा में उस समय गोली चलाई जब लाठी चार्ज और अश्रु गैस विफल हो गई.

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