ये साल अच्छा होगा..

खीर भवानी मंदिर

भारत प्रशासित कश्मीर के माता खीर भवानी मंदिर में शनिवार को वार्षिक पूजा के दौरान कश्मीरी पंडित और उनके मुसलमान हमदर्द मंदिर के प्रांगण में झरने के पानी को देखकर ख़ुशी से झूम उठे.

मंदिर के परोहित भूषण लाल ने कश्मीरी पंडितों के विश्वास का हवाला देते हुए कहा, "चश्मे का पानी अगर साफ़ हो तो हम सबके लिए अच्छा शगुन है और वह साल अच्छा होता है."

"लेकिन अगर पानी गंदला या मटमैला हो तो हम सबके लिए मुश्किलें, यात्रा और परेशानी की भविष्यवाणी है. इस साल माता ने शुभ समाचार दिया है."

भूषण लाल का कहना है कि चश्मे का पानी पिछले बीस साल में कभी भी इतना साफ़ नहीं रहा.

उन्होंने ने कहा, "मैंने अपने बड़ों से सुना है कि 1990 में चश्मे का पानी काला था, जैसे उसमें धुआं मिलाया गया हो, कुछ ही महीने बाद पंडितों को घाटी छोड़ कर जाना पड़ा."

कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से 22 किलोमीटर दूरी पर गांदरबल के तोलामोला गांव में खीर भवानी का मंदिर 1912 में डोगरा महाराजा ने बनवाया था. अंतिम डोगरा महाराजा हरि सिंह ने इसमें विस्तार किया था और मरम्मत भी कराई थी.

कुछ लोग इसे क्षीर भवानी का मंदिर भी कहते हैं.

किताबों में लिखा है

Image caption यहां हिंदू मुसलमान हर प्रकार के श्रद्धालु आते हैं

हिंदू मिथकों के अनुसार भगवान राम बनवास के दौरान कई साल तक माता रागनी देवी की पूजा करते रहे और बनवास के बाद हनुमान से कहा कि वह माता के लिए उनका मनपसंद स्थान तलाश करें.

इस प्रकार माता ने कश्मीर का चयन किया और हनुमान ने उनकी स्थापना तोला मोला में की. प्राचीन समय में एक कश्मीरी पुरोहित को माता ने सपने में बताया कि इस मंदिर का नाम खीर भवानी रखें.

इस मंदिर में मौजूद एक प्राकृतिक झरने से हर धर्म के लोगों की श्रद्धा है. हर साल पूजा से पहले इसमें श्रद्धालु दूध और खीर डालते हैं. इस खीर से चश्मे का पानी रंग बदलता है.

भूषण लाल कहते हैं, "खीर का मतलब दूध और भवानी का मतलब भविष्यवाणी है. यही कारण है कि झरने की मंदिर में बहुत महत्ता है."

इस विचार से यहां के मुसलमान और पंडित दोनों सहमत हैं. एक स्थानीय महिला फ़हमीदा जो माता के लिए दूध और अन्य चीज़ें भेंट में लाई थीं.

उन्होंने बताया, "ये हमारे लिए तीर्थ है, हमारी मुराद पूरी होती है, मेरी दादी कहती थीं, माता भगवान की चहेती महिला थीं जो कभी मछली तो कभी कोयल का रूप धारण कर कश्मीर में बस्ती रही हैं."

अधूरी कश्मीरियत

Image caption खीर भवानी मंदिर का निर्माण 1912 में हुआ था

शनिवार को सैंकड़ों कश्मीरी पंडितों, ज़्यादातर हिंदू पर्यटकों और मुसलमानों ने बड़ी संख्या में मंदिर की वार्षिक पूजा में भाग लिया. इस मौक़े पर जम्मू कश्मीर के मुख्य मंत्री उमर अब्दुल्लाह ने कहा, "कश्मीरी पंडितों की वापसी के बिना कश्मीरियत अधूरी है."

याद रहे कि कश्मीरी पंडित भय और असुरक्षा के कारण बड़ी संख्या में बीस साल पहले घाटी छोड़ कर जम्मू, दिल्ली और अन्य राज्यों में चले गए थे. उन्हें वापस कश्मीर में बसाने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 1500 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता का एलान किया है जिसके तहत कश्मीरी पंडितों को नौकरियाँ और मकान मुहैया कराया जाएगा.

उमर अब्दुल्लाह ने इस संदर्भ में कहा, "हम लोग पंडितों के बिना अधूरे हैं, उनको वापस लाने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है."

कश्मीरी पंडितों के लिए हर ओर से मदद और सरकारी पैकेज का ऐलान सुनकर एक श्रद्धालु पंडित ने कहा, लगता है इस बार कुछ होगा, खीर भवानी का पानी देख कर मेरा विश्वास और भी पुख़्ता हो गया है.

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