माओवादियों का विरोध सप्ताह

  • 22 जून 2010
Image caption माओवादियों ने यूपीए सरकार के ख़िलाफ़ अभियान तेज़ करने की बात कही है

माओवादियों ने केंद्र सरकार की कथित ‘जनविरोधी’ नीतियों के विरोध में 23 से 29 जून तक विरोध सप्ताह मनाने की घोषणा की है.

माओवादियों ने पाँच राज्यों- उड़ीसा, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में 30 जून और एक जुलाई को दो दिनों की हड़ताल का भी आह्वान किया है.

लेकिन इस बार उन्होंने आवश्यक सेवाओं को इससे अलग रखा है, इसमें रेल व्यवस्था भी शामिल है.

इसके पहले ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस की दुर्घटना में माओवादियों के एक सहयोगी संगठन का हाथ होने का आरोप लगा था. इसमें 150 लोगों की मौत हो गई थी.

माओवादियों के प्रवक्ता कामरेड राजू ने बीबीसी से कहा कि माओवादी नेताओं ने लोगों से अपील की है कि वे कांग्रेस नेतृत्ववाली यूपीए सरकार के ख़िलाफ़ अभियान तेज़ करें.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी के नेता कामरेड राजू ने कहा,''अब साफ़ हो गया है कि ये सरकार अमरीका की नीतियों पर चल रही है. उन्होंने भोपाल कांड के लिए ज़िम्मेदार यूनियन कार्बाइड के वारेन एडंरसन को बचाया. वो अब भी अमरीकी हितों की रक्षा कर रही है.''

उन्होंने भारत-अमरीका परमाणु समझौते को तत्काल रद्द करने की माँग की.

साथ ही भारतीय जनता से परमाणु जवाबदेही विधेयक के ख़िलाफ़ कड़ा विरोध व्यक्त करने का आह्वान किया.

माओवादी नेता का कहना था,''ये विधेयक भारत के गले पड़े एक बड़े पत्थर की तरह है.''

उल्लेखनीय है कि हाल में माओवादियों ने पुलिस की कार्रवाई के विरोध में चार दिन का विरोध दिवस मनाया था. इस कार्रवाई में उनके आठ लोग मारे गए थे.

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