संदिग्धों को पकड़ने के लिए 10 लाख का पुरस्कार

  • 11 जुलाई 2010
चार मीनार (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption वर्ष 2007 में मक्का मस्जिद विस्फोट हुए थे

सीबीआई ने हैदराबाद की मक्का मस्जिद में बम विस्फोट की छानबीन की गति तेज़ करते हुए मंगलवार को घोषणा की है कि इस केस के दो प्रमुख संदिग्धों को पकड़ने में मदद करनेवालों को 10 लाख रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा.

सीबीआई इस केस में आरएसएस के दो कार्यकर्ताओं संदीप डांगे उर्फ़ परमानंद और रामचंद्र उर्फ़ रामजी उर्फ़ विष्णु पटेल को ढूंढ रही है. इन दोनों का संबंध मध्य प्रदेश के शहर इंदौर से है.

सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा है की इन दोनों में से हर एक की गिरफ़्तारी में मदद करने वाले को 10 लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा.

मक्का मस्जिद और अजमेर की दरगाह में 2007 में हुए विस्फोटों में इनके लिप्त होने की बात उस समय सामने आई थी जब राजस्थान पुलिस ने अप्रैल ने आरएसएस के एक और प्रचारक देवेंद्र गुप्ता और उसके साथी लोकेश शर्मा को गिरफ़्तार किया था.

अब ये दोनों व्यक्ति मक्का मस्जिद केस के सबंध में हैदराबाद में हैं और सीबीआई देवेंद्र गुप्ता से पूछताछ कर रही है.

गत सप्ताह दोनों को अजमेर से हैदराबाद लाए जाने के बाद से इस केस की छानबीन तेज़ हो गई है.

देवेद्र गुप्ता को हैदराबाद की अदालत ने 10 दिन के लिए सीबीआई की रिमांड में दे दिया है और लोकेश शर्मा की पहचान के लिए उसकी गवाहों के सामने परेड कराई जाने वाली है.

इस दौरान दो अहम घटनाओं में सीबीआई ने अदालत से अनुरोध किया है की अभियुक्तों की सूची में एक और व्यक्ति सुनील जोशी का नाम जोड़ा जाए क्योंकि वो भी इस मामले में लिप्त है.

सुनील जोशी को हैदराबाद और अजमेर में हुए बम विस्फोटों के कुछ समय बाद दिसंबर, 2007 में कुछ अज्ञात लोगों ने मध्य प्रदेश में गोली मार दी थी.

सीबीआई के मुताबिक़ इस पूरे षडयंत्र के पीछे सुनील जोशी का हाथ था.

कड़ी कार्रवाई की मांग

साथ ही सीबीआई ने अदालत से यह भी कहा है की इस मामले के अभियुक्तों के ख़िलाफ़ यूएपीए यानि ग़ैर क़ानूनी गतिविधी निरोधक क़ानून के अंतर्गत भी आरोप दर्ज किए जाए क्योंकि ये लोग पहले से ही हत्या और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं.

सीबीआई की अब तक की छानबीन से पता चला है की मक्का मस्जिद में जिन तीन लोगों ने बम रखा था उनमें संदीप डांगे, रामजी और सुनील जोशी शामिल थे.

ये तीनों व्यक्ति इंदौर से ट्रेन से हैदराबाद पहुंचे, सिकंदराबाद की एक होटल में ठहरे, वहां उन्होंने बम बनाया.

18 मई, 2007 को जुमा के दिन वे एक ऑटो रिक्शा में मक्का मस्जिद के निकट पहुंचे, पर्यटक के भेस में वे अंदर गए, बम रखने के बाद वहां से चले गए. बाद में उन्होंने टीवी पर विस्फोट की ख़बर सुनी और हैदराबाद से निकल गए.

उनके किसी स्थानीय सहायकों का पता लगाने के लिए सीबीआई दूसरे लोगों से भी पूछताछ कर रही है.

जहाँ तक देवेंद्र गुप्ता और लोकेश शर्मा का सवाल है, गुप्ता ने उन सिम कार्डों का इंतज़ाम किया था जिन का उपयोग बमों के विस्फोट में किया गया.

लोकेश शर्मा ने मक्का मस्जिद के आसपास घूम कर जानकारी इकट्ठा की और योजना तैयार करने में सहायता की.

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