भारत-अमरीका कारोबारी संबंध बढ़ाने की पहल

प्रणव मुखर्जी और हिलेरी क्लिंटन

भारत के वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने मंगलवार को अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन के साथ वाशिंगटन में मुलाक़ात की.

अमरीका और भारत के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की बैठक के दौरान वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने अलग से हिलेरी क्लिंटन के साथ बैठक की.

हालांकि आधिकारिक रूप से दोनों की बातचीत का ब्यौरा नहीं दिया गया.

बैठक के बाद दोनों नेताओं ने भारत-अमरीका सीईओ फोरम की बैठक में हिस्सा लिया.

लेकिन इस बैठक में डाउ केमिकल्स के प्रमुख में हिस्सा नहीं लिया. माना जा रहा है कि भोपाल गैस कांड के फ़ैसले बाद उठे विवाद के कारण उन्होंने इसमें हिस्सा नहीं लिया.

डाउ केमिकल्स का कहना था कि सीईओ एड्रयू लिवेरिस का पहले से कुछ तय कार्यक्रम था जिसकी वजह से वो इस बैठक में हिस्सा नहीं ले रहे हैं.

ग़ौरतलब है कि डाउ केमिकल्स ने 1999 में यूनियन कार्बाइड को ख़रीद लिया था.

भोपाल में यूनियन कार्बाइड के कारखाने में 1984 में औद्योगिक हासदा हुआ था जिसमें हज़ारों लोगों की जान चली गई थी.

डाउ केमिकल्स ने खुद को इस हादसे से पूरी तरह अलग रखने का फ़ैसला किया है.

संबंधों को बढ़ाने की अपील

इधर सीईओ फोरम में अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन और भारत के वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कॉरपोरेट जगत से भारत-अमरीका संबंधों को नए स्तर पर ले जाने की अपील की.

प्रणव मुखर्जी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर पेश की. उनका कहना था कि अगले पाँच वर्ष में भारत की विकास दर दहाई में होगी.

उन्होंने बताया कि पिछली तिमाही में विकास दर 8.6 फ़ीसदी रही थी और उनके मंत्रालय ने इस वर्ष विकास दर 8.5 फ़ीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया है.

प्रणव मुखर्जी का कहना था कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने विकास दर 8.8 फ़ीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया है.

सीईओ की बैठक की सह अध्यक्षता टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा और हनीवेल के प्रमुख डेविड कोटे ने की.

भारत की ओर से रिलायंस इंडस्ट्री के मुकेश अंबानी, भारती टेलीकॉम के सुनील भारती मित्तल, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन ओपी भट्ट, टीवीएस के वेणु श्रीनिवासन और आईसीआईसीआई की चंदा कोचर ने हिस्सा लिया.

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