आंध्र में क़ैदी करेंगे समाज सेवा

  • 24 जून 2010
जेल, फ़ाईल फ़ोटो
Image caption दुनिया भर में क़ैदियों को बेहतर सुविधा दिए जाने के लिए मानवाधिकार संगठन काम कर रहे हैं

आंध्र प्रदेश भारत का ऐसा पहला राज्य होगा जहाँ मामूली अपराध करने वालों को जेलों में क़ैद नहीं रखा जाएगा बल्कि उनसे सामाजिक सेवा करवाई जाएगी.

इसके अलावा राज्य सरकार ने जेलों में निजी उद्योग स्थापित करने की अनुमति देने और काम करने वाले क़ैदियों का वेतन बढ़ाने का भी फ़ैसला किया है.

जेलों में सुधार लाने और क़ैदियों की हालत बेहतर बनाने के लिए स्थापित किए गए जेल विकास बोर्ड की पहली बैठक बुधवार को मुख्यमंत्री के रोसैया की अध्यक्षता में हुई जिसमें कई अहम फ़ैसले लिए गए.

सरकार ने हैदराबाद की चर्लापल्ली जेल में एक बीपीओ या कॉल सेंटर स्थापित करने के सुझाव को स्वीकार कर लिया और इसमें काम करने के लिए चुने गए साक्षर क़ैदियों का प्रशिक्षण शुरू करने के आदेश जारी कर दिए.

यह उस नई नीति का एक हिस्सा है जिसके अंतर्गत सरकार निजी कंपनियों को जेलों में अपनी औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित करने के लिए दावत देना चाहती है.

गृह मंत्री सविता रेड्डी ने पत्रकारों से कहा की सरकार सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के सहयोग को बढ़ावा देते हुए जेलों में नई इकाइयाँ स्थापित करना चाहती है ताकि क़ैदियों के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ सकें, उन्हें मिलने वाला वेतन भी बढ़े और क़ैदी अपने आप को जेल के बाद के जीवन के लिए भी तैयार कर सकें.

सविता रेड्डी ने कहा, "हमारा उद्देश्य क़ैदियों में सुधार और परिवर्तन लाना है ताकि उन्हें अच्छा इंसान बनाया जा सके."

जेल में काल सेंटर

चर्लापल्ली जेल में कॉल सेंटर इसी दिशा में पहला क़दम है. यह सेंटर, बंगलौर की एक आईटी कंपनी रेडियंट इन्फ़ो सिस्टम्स स्थापित करने जा रही है जिसमें दो सौ से ज़्यादा क़ैदी तीन शिफ्ट में काम करेंगे और उन्हें 100 से 150 रुपए प्रति दिन के हिसाब से वेतन दिया जाएगा.

सरकार ने राज्य विधानसभा के अगले सत्र में एक नया विधेयक लाने का फ़ैसला किया है जिसके अंतर्गत एक महीने से एक वर्ष की सज़ा काटने वाले क़ैदियों को जेलों में नहीं रखा जाएगा बल्कि उनसे समाज सेवा का काम करवाया जाएगा.

अधिकारियों का कहना है की उनसे अस्पतालों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और दूसरे सार्वजनिक स्थानों की सफ़ाई का काम करवाया जा सकता है.

उनसे कितने घंटे रोज़ाना काम करवाया जाए इसका फ़ैसला अदालत करेगी. लेकिन अगर उन्होंने अदालत से तय किसी शर्त का उल्लंघन किया तो उन्हें सीधे जेल भेज दिया जाएगा.

गृह मंत्री ने कहा कि इस क़दम से भी मामूली अपराध करने वालों को सुधरने में मदद मिलेगी.

वेतन में इज़ाफ़ा

एक और महत्वपूर्ण क़दम उठाते हुए सरकार ने जेलों में काम करने वाले क़ैदियों का वेतन भी बढ़ाने का फ़ैसला किया है.

जेलों के अतिरिक्त महानिदेशक गोपीनाथ रेड्डी का कहना है कि इस समय मज़दूरी करने वाले क़ैदी को 15 रुपए, कुछ हद तक काम जानने वाले को 20 रुपए और पूरी तरह काम जानने वाले कारीगर को 30 रुपए प्रति दिन वेतन दिया जाता है.

लेकिन अब सरकार ने उन सब का वेतन बढ़ाकर क्रमश: 30, 50 और 70 रुपए करने का फ़ैसला किया है.

गोपीनाथ रेड्डी ने कहा कि इन क़ैदियों के वेतन का 30 प्रतिशत हिस्सा एक ऐसे कोष में जाएगा जिससे किसी भी क़ैदी के अपराध का निशाना बनने वाले परिवार की सहायता की जाएगी.

बाक़ी बची राशि से क़ैदी को खाना मिलेगा और पैसे उसके बैंक खाते में जमा करवा दिए जाएंगे.

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