पूर्वानुमान से अधिक बारिश होगी

  • 26 जून 2010

मौसम विभाग ने कहा है कि देश में इस बार पूर्वानुमान से अधिक बारिश होगी और मॉनसून के दौरान सितंबर में सबसे ज़्यादा बरसात देखने को मिलेगी.

जुलाई में अच्छी बारिश होना कृषि के हिसाब से बेहद अहम है क्योंकि इसी दौरान ख़रीफ़ फ़सलों की बुआई होती है.

देश के लगभग आधे हिस्से में सक्रिय मॉनसून 18 जून के बाद धीमा पड़ गया है लेकिन बिहार, झारखंड और मध्यप्रदेश में इसके फिर से तेज़ी पकड़ने के आसार नज़र आ रहे हैं.

अप्रैल में मॉनसून के सिलसिले में दिए गए पूर्वानुमान में मौसम विभाग ने थोड़ा बदलाव किया है. अब उसका कहना है कि जून से सितंबर के बीच लॉँग एवरेज पीरियड के हिसाब से 102 फ़ीसदी बारिश होगी.

लॉँग एवरेज पीरियड (एलीपए) 50 साल के दौरान देश भर में हुई औसत बारिश है. ये 89 सेंटीमीर मापी गई है. अप्रैल में मौसम विभाग ने कहा था कि एलपीए के हिसाब से 98 फ़ीसदी बारिश होगी.

दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए मौसम विभाग के निदेशक अजीत त्यागी ने कहा कि जुलाई ( 98 फ़ीसदी ) और अगस्त में 101 फ़ीसदी बारिश होने की उम्मीद है.

पिछले साल सूखे के बाद इस वर्ष देश भर के किसान अच्छे मॉनसून की उम्मीद लगाए हुए हैं. सूखे के कारण धान की पैदावार पिछले साल काफ़ी कम हुई थी.

इस साल केरल में मॉनसून ने 31 मई को दस्तक दे दी थी लेकिन बाद में ये धीमा पड़ गया था. एक जून से 23 जून के बीच 97.4 मिलीमीटर बारिश हुई है जो सामान्य से 11 फ़ीसदी कम है.

लेकिम मौसम विभाग के लोगों का कहना है कि चिंता की बात नहीं है क्योंकि अब भी उम्मीद है कि अच्छी बारिश होगी.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार