पेट्रोल डीज़ल क़ीमतें बढ़ाने का विरोध

Image caption बीजेपी ने पिछले दिनों मंहगाई के ख़िलाफ संसद चलने का आह्वान किया था.

केंद्रीय मंत्रिमंडल के पेट्रोल की क़ीमतों पर से सरकारी नियंत्रण हटाने के फ़ैसले का फिक्की ने स्वागत किया है जबकि क़ीमतें बढ़ाने की राजनीतिक दलों ने आलोचना की है और इसे जनविरोधी बताया है.

फिक्की ने अपने एक बयान में कहा है कि वो पेट्रोल क़ीमतों पर सरकारी नियंत्रण हटाने के फ़ैसले का सैद्धांतिक समर्थन करते हैं. फिक्की के महासचिव अमित मित्रा ने बयान जारी कर कहा, '' पेट्रोल की क़ीमतों पर सरकारी नियंत्रण हटाना सही क़दम है. डीज़ल क़ीमतों के साथ भी यही होना चाहिए.सरकार ने केरोसीन और एलपीजी क़ीमतों पर सब्सिडी जारी रखी है जो सही है.''

हालांकि फिक्की ने कहा कि बढती क़ीमतों को देखते हुए कोई ऐसी प्रणाली होनी चाहिए जिससे बढ़ती तेल क़ीमतों के प्रभाव के कारण मंहगाई को तेज़ी से बढ़ने से रोका जा सके. फिक्की ने राज्य सरकारों पर तेल क़ीमतों पर टैक्स लगाने का सुझाव दिया है.

दूसरी तरफ़ मंत्रिमंडल ने तेल क़ीमतें भी बढ़ाई है जिसकी बीजेपी और वामपंथी दलों ने कड़ी आलोचना की है.

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा, ''यह सरकार आम आदमी को नुकसान ही पहुंचा रही है. क़ीमतें बढ़ती जा रही हैं. अभी पेट्रोल डीज़ल की क़ीमतें बढ़ी हैं तो पहले से ही बढ़ी हुई मंहगाई और बढ़ेगी.''

भाजपा ने कहा है कि इसके ख़िलाफ़ पूरे देश में आंदोलन चालया जाएगा. उधर वामपंथी दल सीपीएम ने भी क़ीमतें बढ़ाने का विरोध किया है और कहा है कि सरकार आम लोगों पर मंहगाई का बोझ बढ़ाती ही जा रही है.

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