आर्थिक पैकेज वापसी में सावधानी बरतें: मनमोहन

  • 28 जून 2010

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विकसित देशों को आर्थिकप्रोत्साहन पैकेजों को वापस लेने के मुद्दे पर आगाह किया है.

जी-20 देशों के सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने कहा कि यूरोपीय संकट को देखते हुए सार्वजनिक खर्च में कटौती करने में सावधानी बरती जानी चाहिए क्योंकि इससे विश्व अर्थव्यवस्था के दूसरी बार मंदी में डूबने का ख़तरा पैदा हो सकता है.

उन्होंने कहा कि हमारे समक्ष मुद्रास्फीति की बजाए मंदी का अधिक जोखिम है. उल्लेखनीय है कि 2008 के वित्तीय संकट से निपटने के लिए ये पैकेज दिए गए थे. मनमोहन सिंह ने कहा कि हालात सामान्य नहीं हैं और विश्व अर्थव्यवस्था के मंदी से उबरने की प्रक्रिया अब भी नाजुक दौर में है और औद्योगिक देशों में माँग में गिरावट से दोबारा मंदी की स्थिति पैदा हो सकती है. ग़ौरतलब है कि यूरोपीय देशों ने अपने सार्वजनिक खर्च में कटौती शुरू कर दी है क्योंकि उन्हें आशंका है कि सरकारी कर्ज बढ़ सकता है.

फ्रांस और जर्मनी जैसे देश बैंकों को संकट से उबारने के लिए आवश्यक धनराशि जुटाने के उद्देश्य से कर लगाने पर जोर दे रहे हैं. दूसरी ओर अमरीका अब भी प्रोत्साहन पैकेज जारी रखने का पक्षधर है.

भारत भी बैंकों को संकट से उबारने के लिए आवश्यक धन जुटाने के उद्देश्य से कर लगाने का विरोधी है और वो प्रोत्साहन पैकेज जारी रखना चाहता है.

मनमोहन सिंह का कहना था कि उनका देश 2011-12 तक नौ प्रतिशत की विकास दर हासिल कर लेगा, साथ ही अगले तीन साल में उसका राजकोषीय घाटा आधा रह जाएगा.

सहमति

इधर जी-20 देशों के नेता आर्थिक विकास की रफ़्तार कम किए बगैर राष्ट्रीय बजट घाटा कम करने पर सहमत हो गए हैं.

जी-20 सम्मेलन में मेज़बान देश कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफ़न हार्पर ने कहा है कि गुट के सबसे अमीर देशों को अपना घाटा तीन साल के अंदर आधा कर देना चाहिए.

हालांकि स्टीफ़न हार्पर का कहना था कि विकास के लिए आर्थिक मदद की योजनाएँ जारी रहनी भी ज़रूरी हैं. उन्होंने कहा है कि बैंक कर लागू करने का फ़ैसला हर देश को अपने स्तर पर लेना होगा.

दो दिन तक चली जी-20 देशों की बातचीत के बाद नेताओं ने कहा है कि आर्थिक विकास को और तेज़ी देना उनकी पहली प्राथमिकता है.

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