कश्मीर में तनाव के बीच तीन और मौतें

  • 29 जून 2010
सोपोर में प्रदर्शन

भारत प्रशासित कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षाबलों की गोलियों से तीन लोगों की मौत हो गई है और कई अन्य घायल हुए हैं.

दक्षिण कश्मीर के शहर अनंतनाग में राज्य पुलिस की गोली से तीन नवयुवकों की मौत हुई है और तीन घायल हुए हैं.

जबकि श्रीनगर, बारामूला और सोपोर में कई प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं.

हिंसक प्रदर्शनों के बीच बारामूला, अनंतनाग और श्रीनगर के सात थाना क्षेत्रों में सुबह से कर्फ़्यू लगा दिया गया था.

लेकिन तनाव के माहौल के बीच प्रदर्शनकारी कर्फ़्यू का उल्लंघन करके सड़कों पर आ रहे हैं. जगह-जगह सुरक्षाबलों पर पथराव हुआ है.

प्रदर्शनों का यह दौर शुक्रवार से शुरु हुआ जब वहाँ कथित तौर पर सीआरपीएफ़ की गोलियों से दो युवकों की मौत हो गई.

इसके बाद रविवार की रात को भी वहाँ एक नवयुवक की मौत हो गई थी.

इस बीच हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के गिलानी और मीरवाइज़ दोनों धड़ों ने इन मौतों का विरोध करते हुए 'सोपोर मार्च' का आव्हान किया था लेकिन सोमवार को इस मार्च को रास्ते में रोका गया जिसमें प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें भी हुईं.

इस बीच केंद्रीय गृहसचिव जीके पिल्ले ने कर्फ़्यू का उल्लंघन कर रहे लोगों को 'निर्दोष नागरिक' मानने से इनकार कर दिया है.

गोलीबारी और तनाव

अनंतनाग में प्रदर्शनकारियों पर चलाई गई गोलियों से अब तक तीन लोगों के मारे जाने की ख़बरें आ चुकी हैं.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि खनबल-पहलगाम चौक पर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने उन्होंने दौड़ाया.

उनका कहना है कि प्रदर्शनकारियों का पीछा करते राज्य पुलिस के कुछ जवान पास की एक कॉलोनी में घुस गए.

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वहाँ पुलिस ने दो ऐसे नवयुवकों को गोली मार दी, जो प्रदर्शन में शामिल ही नहीं थे.

स्थानीय लोगों के अनुसार मारे गए लोगों में एक दसवीं कक्षा का छात्र इश्तियाक है और उसकी उम्र 15 साल है. दूसरा नवयुवक इम्तियाज़ 17 साल का है और वह बेकरी की एक दूकान चलाता था.

अनंतनाग में प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाबलों की कार्रवाई में कई अन्य लोग घायल हुए हैं.

इस बीच श्रीनगर, सोपोर, बारामूला ज़िलों से भी लोगों के घायल होने की ख़बरें हैं.

इन सभी स्थानों पर तनाव क़ायम है.

'निर्दोष नहीं'

उधर भारत के गृह सचिव जीके पिल्ले ने भारतीय टीवी चैनल एनडीटीवी के साथ बातचीत में कहा है कि जो लोग कर्फ़्यू का उल्लंघन करते हैं उन्हें ‘निर्दोष नागरिक’ नहीं कहा जा सकता है.

पिल्ले का कहना था, "मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपनी पूरी क्षमता से स्थिति का सामना कर रहे हैं...जहाँ कर्फ़्यू लगाया जाता है और लोग उसका उल्लंघन कर केंद्रीय रिज़र्व पुलिस की चौंकियों पर धावा बोलते हैं...मुझे नहीं लगता उन्हें निर्दोष नागरिक कहा जा सकता है."

एक सवाल के जवाब में पिल्ले का कहना था, "…आप क्या चाहते हैं...भीड़ को सीआरपीएफ़ के जवानों की जान लेने दी जाए?"

जीके पिल्ले का यह बयान कश्मीर के अलगाववादी नेताओं के इस आरोप के बाद आया है कि राज्य में सुरक्षाबल, विशेष रुप से सीआरपीएफ़ निर्दोष नागरिकों को मार रहे हैं.

राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी सीआरपीएफ़ के प्रति नाराज़गी ज़ाहिर की थी और इस विषय में केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम से भी बात की थी.

सीआरपीएफ़ के महासचिव विक्रम श्रीवास्तव ने सोमवार को बीबीसी से हुई बातचीत में सीआरपीएफ़ का बचाव करते हुए कहा था कि सीआरपीएफ़ कश्मीर में पूरे संयम के साथ काम कर रही है.

संबंधित समाचार