नक्सली हमले में 26 जवानों की मौत

नक्सली हमले में मारे गए सीआरपीएफ़ जवानों को श्रद्धांजलि
Image caption अप्रैल में नक्सली हमले में 76 सीआरपीएफ़ जवानों की मौत ने राज्य और केंद्र सरकार को हिला कर रख दिया

छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों या माओवादियों ने सीआरपीएफ़ के जवानों के एक दल पर घात लगाकर हमला किया है केंद्रीय गृहमंत्रालय ने कम से कम 26 जवानों के मारे जाने की पुष्टि की है.

बताया गया है कि शाम कोई साढ़े पाँच बजे हुए इस हमले में कई अन्य घायल हुए हैं.

घायलों में से कुछ की हालत गंभीर बताई गई है और आशंका जताई गई है कि मरने वालों की संख्या और अधिक हो सकती है.

घायलों को नारायणपुर और जगदलपुर अस्पतालों में लाया गया है.

हमले के बाद राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह राज्य के पुलिस महानिदेशक सहित आला अधिकारियों की बैठक की है.

पिछले तीन महीनों में यह छत्तीसगढ़ में नक्लसियों का तीसरा बड़ा हमला है.

नक्सलियों ने सुरक्षाबलों की कार्रवाई के विरोध में पाँच राज्यों में मंगलवार की रात 12 बजे से दो दिनों के बंद का आह्वान किया है और बंद शुरु होने से पहले यह हमला हुआ है.

हमला

सीआरपीएफ़ के अधिकारियों के अनुसार सीआरपीएफ़ की 39वीं बटालियन के 70 जवानों का एक दल बंद को ध्यान में रखते हुए नारायणपुर से ओरछा मार्ग पर बारूदी सुरंग आदि का पता लगाने के लिए जा रहा था.

Image caption नक्सली ऑपरेशन ग्रीन हंट का विरोध कर रहे हैं

अधिकारियों का कहना है कि यह 'रोड ओपनिंग पार्टी' थी.

अधिकारियों के अनुसार नारायणपुर से 32 किलोमीटर दूर धोड़ई गाँव के पास बड़ी संख्या में हथियारबंद नक्सलियों ने इस सीआरपीएफ़ के इस दल पर घात लगाकर हमला किया.

अधिकारियों का कहना है कि इसमें कम से कम 26 जवान मारे गए हैं.

गंभीर रुप से घायल चार जवानों को हेलिकॉप्टर से जगदलपुर अस्पताल लाया गया है, शेष घायलों को नारायणपुर अस्पताल में भर्ती किया गया है.

अधिकारियों का कहना है कि यह बस्तर का अबूझमाड़ का इलाक़ा है जिसे नक्सली 'लिबरेटेड ज़ोन' कहते हैं यानी यह नक्सली दबदबे वाला इलाक़ा है.

उनका कहना है कि चूंकि अंधेरा हो गया है इसलिए बचाव कार्य में बाधा आई है.

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सीआरपीएफ़ के दल के शेष जवानों की स्थिति क्या है और इस मुठभेड़ में नक्सलियों को कितना नुक़सान हुआ है.

अधिकारियों का कहना है कि हताहतों की संख्या और अधिक हो सकती है.

तीसरा बड़ा हमला

Image caption बस को बारूदी सुरंग को उड़ाने से 35 लोंगों की मौत हुई थी

छत्तीसगगढ़ में पिछले तीन महीनों में यह नक्सलियों का तीसरा बड़ा हमला है.

छह अप्रैल को दंतेवाड़ा में गश्त पर निकले सीआरपीएफ़ के जवानों के एक दल पर नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था जिसमें सीआरपीएफ़ के 76 जवान मारे गए थे.

इस हमले को केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने रणनीतिक चूक बताया था.

इसके बाद 17 मई को नक्सलियों ने बस्तर इलाक़े में ही एक यात्री बस को बारूदी सुरंग लगाकर उड़ा दिया था.

इस बस में पुलिस और विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) सवार थे. इस हमले में कुछ आम नागरिकों सहित 35 लोगों की मौत हो गई थी.

इन हमलों के बाद से छत्तीसगढ़ सहित सभी नक्सल प्रभावित इलाक़ों में सेना के उपयोग या सहायता लेने पर विचार चल रहा है.

नक्सलियों ने इन हमलों को उनके ख़िलाफ़ चल रहे 'ऑपरेशन ग्रीन हंट' के बदले की कार्रवाई बताया है.

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