जाति आधारित जनगणना पर विचार

Image caption जाति के आधार पर जनगणना आख़िरी बार 1931 में हुई थी

केंद्रीय मंत्रिमंडल समूह की गुरुवार को बैठक हो रही है जिसमें जाति आधारित जनगणना के विवादित मसले पर विचार किया जाएगा.

पिछले महीने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कोई फ़ैसला न लिए जाने के बाद सरकार ने इस पर निर्णय लेने का जिम्मा मंत्रिमंडल समूह पर छोड़ दिया था.

वित्तमंत्री और लोकसभा में सदन के नेता प्रणब मुखर्जी इसके अध्यक्ष हैं और क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली, मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल, अक्षय ऊर्जा मंत्री फारूक़ अब्दुल्ला, शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी, रेल मंत्री ममता बनर्जी इसमें शामिल हैं.

ग़ौरतलब है कि राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), समाजवादी पार्टी (एसपी) और जनता दल यूनाइडेट (जेडीयू) जाति आधारित जनगणना की वकालत कर रहे हैं और भाजपा भी इस मांग का समर्थन कर रही है.

लेकिन सत्तारूढ़ गठबंधन यूपीए का नेतृत्व कर रही कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद हैं.

संसद में जाति आधारित जनगणना के मुद्दे पर हुई बहस के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आश्वासन दिया था कि विभिन्न दलों की राय को ध्यान में रखते हुए वे इसे मंत्रिमंडल के समक्ष रखेंगे.

लेकिन मंत्रिमंडल में इस पर एक राय नहीं बन पाई.

जाति आधारित जनगणना का विरोध करने वालों का कहना है कि जब भारत को जाति-विहीन समाज बनाने की बात कही जाती है तब फिर जाति के आधार पर जनगणना क्यों होनी चाहिए.

लेकिन इसका समर्थन करने वालों का कहना है कि अगर जातियाँ हैं तो उनकी जानकारी हासिल करने में आपत्ति नहीं होनी चाहिए.

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