आज़ाद मारे गए, माओवादियों ने कहा -'फ़र्ज़ी मुठभेड़'

माओवादी
Image caption माओवादियों को इस घटना से ख़ासा धक्का लगा है

आंध्रप्रदेश में पुलिस ने दावा किया है कि मुठभेड़ में प्रमुख माओवादी नेता और प्रवक्ता चेरुकुरी राजकुमार उर्फ़ आज़ाद मारे गए है.

पुलिस का कहना है कि उसे घटनास्थल से एके 47, एक पिस्तौल और दो थैले मिले हैं. यह घटना सुबह आदिलाबाद ज़िले के वन्कड़ी मंडल के अंतर्गत जोगपुर के जंगल में घटी बताई गई है.

उधर माओवादियों के प्रवक्ता गुडसा उसेंडी ने बीबीसी के साथ बातचीत में पुलिस के दावे का खंडन किया है.

उनका कहना था कि आज़ाद को गुरुवार को नागपुर में पकड़ा गया था और अब उनके मारे जाने की ख़बर आ रही हैं. उनका कहना था कि अदिलाबाद जाने का आज़ाद का कोई कार्यक्रम ही नहीं था.

राजनीतिक, रणनीतिक मामलों के ज़िम्मेदार

आदिलाबाद ज़िला पुलिस के मुख्य अधिकारी प्रमोद कुमार ने बीबीसी बताया कि घटना में दो नक्सलवादियों की मौत हुई है. इनमें से एक की पहचान आज़ाद के रूप में की गई है जबकि दूसरे की पहचान अभी नहीं हो सकी है.

लेकिन अपुष्ट समाचार के अनुसार दूसरा व्यक्ति भी तेलंगाना प्रांत का एक वरिष्ठ माओवादी नेता चन्द्रानना है.

माओवादियों के प्रवक्ता उसेंडी ने बीबीसी को बताया कि सहदेव नाम के एक सहयोगी आज़ाद का स्वागत करने गए नागपुर गए थे इसलिए संभव है कि पुलिस जिस दूसरे माओवादी को मारने का दावा कर रही है वे दूसरे आदमी सहदेव ही हों.

पुलिस ने बताया कि यह मुठभेड़ उस समय हुई जब पुलिस की एक टुकड़ी इलाक़े में गश्त कर रही थी.

आज़ाद पार्टी की केंद्रीय समिति के सदस्य होने के साथ-साथ पार्टी के प्रवक्ता थे और राजनीतिक और संगठनात्मक मामलों के लिए ज़िम्मेदार थे.

उन्हें पार्टी के महासचिव मुप्पल लक्ष्मण राव के बाद सबसे अहम नेता माना जाता था.

वो पिछले पैंतीस वर्षों से इस आंदोलन से जुड़े थे. आज़ाद ने वारंगल के क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेज से मास्टर्स इन टेक्नोलोजी की डिग्री ली थी.

आज़ाद ने कॉलेज के ज़माने से ही माओवादी गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया था.

उनके सर पर 12 लाख रुपए का इनाम था. जिन बड़े मामलों में उनकी तलाश थी उनमें भूतपूर्व मुख्यमंत्री एन जनार्धन रेड्डी पर विफल जानलेवा हमला और एक कांग्रेसी विधायक नरसी रेड्डी सहित दस लोगों की हत्या का आरोप शामिल है.

माओवादियों को झटका

तीन महीने पहले ही सीपीआई माओवादी ने 12 मार्च 2010 को कहा था की आज़ाद लापता हो गए हैं.

संगठन ने आंध्र प्रदेश पुलिस पर आरोप लगाया था कि उसने आज़ाद को पकड़ लिया है. उसने आशंका भी व्यक्त की थी कि पुलिस फ़र्ज़ी झड़प में आज़ाद को मार सकती है.

लेकिन उसके बाद संगठन ने एक और बयान जारी करके कहा था कि आज़ाद सुरक्षित ढंग से अपने ठिकाने पर पहुँच गए हैं.

एक वर्ष में मारे जाने वाले आज़ाद तीसरे बड़े माओवादी नेता हैं. पिछले वर्ष आंध्र प्रदेश पुलिस ने केंद्रीय मिलीटरी आयोग के सदस्य पटेल सुधाकर रेड्डी को वारंगल ज़िले में और राज्य समिति के सदस्य शाखामुरी अप्पा राव को प्रकाशम् ज़िले में मार दिया था.

नक्सलवादियों ने भी पिछले कुछ महीनों में कई बड़े हमले किए हैं. दो दिन पहले 29 जून को ही माओवादियों ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में सीआरपीएफ़ जवानों के एक दल पर घात लगाकर हमला किया था जिसमें 27 जवानों की मौत हो गई थी.

इन हमलों के बाद पुलिस की ओर से माओवादियों के ख़िलाफ़ ये सबसे बड़ी कार्यवाही है.

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