आज़ाद के साथ मारा गया व्यक्ति 'पत्रकार'

विनीता पाण्डेय.
Image caption मारे गए हेमचंद्र की पत्नी विनीता पांडे ने आरोप लगाया कि मुठभेड़ फ़र्ज़ी थी

वरिष्ठ माओवादी नेता और सीपीआई (माओवादी) के प्रवक्ता चेरुकुरी राजकुमार उर्फ़ आज़ाद की आंध्रपुलिस के साथ तथाकथित झड़प में मारे जाने के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है क्योंकि उनके साथ मारे गए दूसरे व्यक्ति की पहचान एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में की गई है.

आंध्र प्रदेश पुलिस का कहना था की आज़ाद और एक दूसरा माओवादी आदिलाबाद ज़िले के जंगल में शुक्रवार की सुबह एक झड़प में मारे गए थे लेकिन अब दुसरे व्यक्ति की पहचान उत्तराखंड के रहने वाले हेमचन्द्र पांडे के रूप में की गई है.

सीपीआई(माओवादी) की दंडकारण्य समिति के प्रवक्ता गुड्सा उसेंडी ने बीबीसी को बताया है कि हेमचन्द्र पांडे दिल्ली स्थित पत्रकार थे जो नई दुनिया और राष्ट्रीय सहारा समाचार पत्रों के लिए लिखते थे.

वो देवलथल गाँव पिथौरागढ़, उत्तराखंड के रहने वाले थे.

माओवादी प्रवक्ता का कहना है की जिस समय आज़ाद और यह पत्रकार दंडकारण्य का सफ़र कर रहे थे, उन्हें नागपुर में पुलिस ने पकड़ लिया और बाद में उन्हें आदिलाबाद ज़िले में एक नकली मुठभेड़ में मार दिया गया.

गुड्सा उसेंडी ने कहा कि पत्रकार को केवल इसलिए मारा गया क्योंकि वो आज़ाद के पकड़े जाने और उनकी हत्या के गवाह थे और पुलिस ने इस घटना की सच्चाई को छुपाए रखने के लिए उसे मार डाला.

हालाँकि इन दोनों समाचारपत्रों ने हेमचंद्र पांडे के उनके यहां काम करने की पुष्टि नहीं की है लेकिन पांडे के परिवार का कहना है कि वो पत्रकारिता के काम से ही बाहर गए हुए थे.

उधर दिल्ली में शनिवार की शाम हेमचंद्र पांडे की पत्नी विनीती पांडे ने पूर्व आईएएस अधिकारी और जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता बीडी शर्मा की मौजूदगी में एक संवाददाता सम्मेलन में पुलिस के दावे को ख़ारिज करते हुए मुठभेड़ को फ़र्जी क़रार दिया.

विनीता पांडे ने कहा, ''मेरे पति पत्रकारिता के काम से नागपुर जा रहे थे और वो दो जुलाई को वापस आने वाले थे. लेकिन वो नही आए बाद में अखबारों में ख़बर आने के बाद मुझे ये पता चला.'' विनीता के मुताबिक़ उनके पति फ्रीलांस पत्रकार थे जो नई दुनिया, सहारा और दैनिक जागरण जैसे अख़बारों के लिए लिखते थे.

उन्होंने दोषियों की गिरफ़्तारी की मांग करते हुए कहा कि वो उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर करेंगी.

जांच की मांग

इधर आंध्र प्रदेश पुलिस ने भी इस मामले में चुप्पी साध रखी है.

माओवादिओं के समर्थक वरवर राव ने कहा है की यह पत्रकार दंडकारण्य क्षेत्र (छत्तीसगढ़) में आदिवासिओं पर ऑपरेशन ग्रीन हंट के नाम पर होने वाले अत्याचार की रिपोर्टिंग के लिए वहां जा रहे थे.

उन्होंने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच करने की मांग की है.

कुछ मानव अधिकार संगठनों ने यह मामला राज्य के मानवाधिकार आयोग के सामने उठाया है और आयोग ने आदिलाबाद ज़िला प्रशासन से कहा है कि वो इस दूसरे व्यक्ति के शव को सुरक्षित रखें जब तक की उनके परिवार का कोई सदस्य उसे लेने नहीं आता.

साथ ही आयोग ने कहा है कि उस शव के चित्र समाचार पत्रों में प्रकाशित किए जाएँ ताकि लोग उसे पहचान सकें.

पत्रकार नाराज़

इस ख़बर ने कि पुलिस ने कथित रूप से एक पत्रकार को मार डाला है, आंध्र प्रदेश के पत्रकारों में चिंता और ग़ुस्से की लहर दौड़ा दी है क्योंकि राज्य के कई पत्रकार माओवादी नेताओं से मिलने और उनसे साक्षात्कार के लिए जंगलों में जाते रहते हैं.

गुड्सा उसेंडी ने यह भी कहा कि आज़ाद, केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम की ओर से रखे गए युद्ध विराम और शांति वार्ता के प्रस्ताव पर दूसरे माओवादी नेताओं से विचार विमर्श के लिए छत्तीसगढ़ आ रहे थे जब उन्हें पकड़ कर मार डाला गया.

उसेंडी ने कहा कि आज़ाद चाहते थे कि ऑपरेशन ग्रीन हंट को रोका जाए और दोनों ही तरफ़ से एक साथ युद्ध विराम लागू किया जाए.

उसेंडी ने कहा कि जिस तरह से आज़ाद को पकड़ कर मारा गया उससे यह साबित हो गया है कि चिदंबरम के प्रस्ताव झूठे थे.

इधर शनिवार को आज़ाद के शव का अदिलाबाद ज़िले के एक अस्पताल में पोस्टमार्टम किया गया और फिर शव को हैदराबाद लाया गया जहाँ रविवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

हैदराबाद में आज़ाद की माँ और भाई रहते हैं.

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