बारिश के लिए मटका चढ़ाने की परंपरा

  • 4 जुलाई 2010
मटका पीर दरगाह
Image caption जयपुर में पेड़ पर मटका चढ़ाकर लोग बारिश होने की दुआ कर रहे हैं

मानसून के कदम क्या ठिठके, राजस्थान में बारिश के लिए मंदिरों में पूजा अर्चना और मस्जिदों में दुआ के लिए हाथ उठने लगे हैं. जयपुर में 'मटका पीर' की दरगाह पर लोग बरसात के लिए बंदगी कर रहे हैं और बतौर इबादत वहां मटका भेंट कर रहे हैं.

राजस्थान पानी के गंभीर संकट का सामना कर रहा है. सरकार खुद चिंतित है और हालात से निबटने के लिए आपात उपाय अपनाने पर विचार कर रही है.

राजस्थान के जल संसाधन मंत्री महिपाल मदेरणा के मुताबिक, "जयपुर पानी संबंधी अपनी जरूरतों के लिए पड़ोस टोंक जिले में बने बीसलपुर बाँध पर निर्भर है. मगर इस बाँध में अब तली तक पानी सूख चुका है. भीलवाड़ा जैसे शहरों को पानी मुहैया कराने के लिए रेलगाड़ी की मदद लेनी पड़ रही है. अनेक छोटे कस्बों और गांवों में पानी पहुँचाने के लिए मोटर वाहनों को सेवा में लगाया गया है."

जयपुर में वर्षा के लिए अमानी शाह दरगाह में लोग बारिस के लिए दुआ कर रहे हैं तो हिन्दू पूजा स्थलों में भी यज्ञ किए जा रहे हैं.

बारिश की दुआ

जयुपर में एक मक़ाम ऐसा भी है जहाँ लोग बारिस के लिए मटका भेंट कर दुआ करते हैं. यह जगह है अमानी शाह की दरगाह जो कब्रिस्तान पर बनी है.

दरगाह के हाजी मोहम्मद इस्लाम खान कहते हैं, "लोग यहाँ मटका भेंट करके खुशहाली के लिए दुआ करते हैं. ये मटके दरख्तों पर चढ़ा दिए जाते हैं. दुआ की जाती है कि मटके में पानी भरा रहे."

सैयद मिराज मोहम्मद काम काज के लिए सउदी अरब रहते हैं. जयपुर घर लौटे तो दुआ करने मटका बाबा की दरगाह पर चले आए. मिराज कहते हैं कि यहाँ मटका नजर कर हम बरसात के लिए दुआ कर रहे हैं. हमें यकीन है कि खुदा इसे कबूल करेगा और इतनी बारिस अता करेगा कि मुल्क सरसब्ज हो जाएगा.

Image caption मिट्टी के मटकों से पेड़ ऐसे झुके नजर आते हैं मानो वो सज़दा कर रहे हों

दरगाह परिसर में खड़े दरख्त कई बार श्रद्धालुओं के चढ़ाए मिट्टी के मटकों से ऐसे झुके नजर आते हैं मानो उन पर फल आ गए हों और वो सज़दा कर रहे हों.

मगर पेड़ों पर लदे मटकों को बंदर गिरा-गिरा कर ऐसे जाहिर करते हैं मानो वो पानी न बरसने पर रोष दिखा रहे हों. हाजी मोहम्मद कहते हैं, ''पेड़ अमूमन मटकों से लदे नजर आते थे, पर आजकल बंदर इन्हें तोड़-तोड़कर नीचे गिरा देते हैं."

राजस्थान सबसे बड़े सूबे के रूप में भारत का कोई दस फ़ीसदी इलाका घेरे हुए है. मगर कुदरत ने उसे भारत की जलराशि का महज एक फ़ीसदी देना ही स्वीकार किया. बावजूद इसके राज्य की जनता पानी की रजत बूंदों के महत्व से अच्छी तरह से वाकिफ़ है.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार