अब बसपा ने केंद्र पर निशाना साधा

Image caption मायावती ने ख़ुद इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया

सोमवार को भारत बंद से अपने को अलग रखने वाली उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी ने मंहगाई के मुद्दे पर मंगलवार को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के खिलाफ़ पूरे उत्तर प्रदेश में धरना प्रदर्शन किए.

पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जि़ला मुख्यालयों पर रैलियां और धरना प्रदर्शन किए. इन रैलियों को संबोधित करते हुए मायावती सरकार के मंत्रियों ने सीधे-सीधे सोनिया गाँधी तथा राहुल गाँधी पर निशाना साधा.

लखनऊ के चौक स्टेडियम में रैली को संबोधित करते हुए लोकनिर्माण मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मनमोहन सिंह सरकार पर सौ दिनों में मंहगाई घटाने का अपना वादा पूरा न करने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि वादे के उलट डीज़ल, पेट्रोल के दाम बढ़ाकर गरीबों और किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी गई हैं.

'बंद से लोगों को दिक्कत'

सिद्दीकी ने आरोप लगाया की केंद्र की कांग्रेस सरकार पूंजीपतियों की हितैषी है. उनका कहना था, "केंद्र की सरकार बड़े-बड़े उद्योगपतियों से पैसा लेकर मंहगाई बढ़ा रही है. गरीबों को रोटी के लाले पड़े हैं. किसान परेशान हैं. इसका ख़ामियाज़ा सरकार को भुगतना पडेगा. समय आने पर सूद के साथ चुकाना होगा."

सिद्दीकी ने अपने भाषण में सोनिया गाँधी से ज़्यादा राहुल गाँधी को निशाने पर रखा और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने के राहुल गाँधी के मिशन 2012 की हसी उड़ाई.

सिद्दीकी ने अपने भाषण में भारतीय जनता पार्टी , समाजवादी पार्टी और वामपंथी दलों की इस बात के लिए आलोचना की कि उन सभी ने सोमवार को भारत बंद के दौरान जनता को कठिनाई में डाला.

सिद्दीकी का कहना था कि केवल मायावती ही देश की समस्याएँ हल कर सकती हैं.

रैली को सफल बनाने के लिए पूरे शहर में मुख्यमंत्री की तस्वीरों वाले बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए गए थे. लोगों को दूरदराज़ से बसों और ट्रकों में लाया गया था.

लेकिन रैली में आए कई ग़रीब लोग केंद्र सरकार के साथ प्रदेश सरकार के कामकाज से भी असंतुष्ट दिखे. अतरौली गाँव से आई ग़रीब महिलाओं कि एक टोली का कहना था कि एक और कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार मंहगाई बढ़ा रही है तो दूसरी तरफ़ राज्य सरकार में भी ग़रीबों की सुनवाई नही है. वे अपने गाँव में पीने के पानी के अभाव के बारे में कह रही थीं.

बीएसपी की महिला कार्यकर्ताओं को शिकायत थी कि ‘बहन जी दूर हो गई हैं और पार्टी के नेताओं को ग़रीबों की फ़िक्र नहीं है.’

पुलिस प्रशासन के लोग सोमवार के मुकाबले मंगलवार को बदली हुई भूमिका में नज़र आए. सोमवार को भारत बंद के दौरान जहाँ पुलिस ने कई विपक्षी नेताओं को सड़क पर निकलते ही लाठियों से पीटना शुरू कर दिया था, वहीं मंगलवार को पुलिस प्रशासन के लोग बहुजन समाज पार्टी कार्यकर्ताओं को चौक स्टेडियम स्थित रैली स्थल तक पंहुचाने में मदद करते दिखे.

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