दशहरी गाँव को कूड़ाघर बनाने का विरोध

  • 7 जुलाई 2010
दशहरी आम का पेड़
Image caption उत्तर प्रदेश में तीन सौ साल पुराना दशहरी आम का पेड़

उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद क्षेत्र के मशहूर दशहरी गाँव में आम के बागों को बचाने के लिए क्षेत्रीय किसानों ने मंगलवार को विरोध प्रदर्शन किया.

ये किसान दशहरी और आसपास के दो अन्य गाँवों में एक विशाल कूड़ाघर स्थापित करने के उत्तर प्रदेश सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ हैं.

यह विरोध प्रदर्शन हरदोई रोड पर दुबग्गा फलमंडी से कुछ दूर दशहरी मोड पर आयोजित किया गया.

प्रदर्शन में मोहन, काकोरी, मॉल और मलिहाबाद इलाक़ों के किसानों ने हिस्सा लिया.

सभा को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन के नेता हरिनाम सिंह वर्मा ने कहा,''हम लखनऊ विकास प्राधिकरण को इस जमीन पर किसी कीमत पर कूड़ाघर नही बनाने देंगे. किसान हर बलिदान करने को तैयार हैं.''

कम्युनिस्ट नेता परमानन्द और फल पट्टी किसान कल्याण संघ के नेता कबीर अहमद ने भी कूडा प्रबंधन की इस योजना का विरोध किया.

सभा ने सरकार को संबोधित एक पांच सूत्री ज्ञापन स्थानीय पुलिस अधिकारी को सौंपा.ज्ञापन में कहा गया है कि सरकार प्रस्तावित कूड़ाघर कहीं और ऊसर बंजर जमीन पर लगा सकती है.

दशहरी गाँव के प्रधान जसवंत सिंह यादव का कहना है,''हमारी यह उपजाऊ जमीन है. यही जमीन लोगों की रोजी रोटी का साधन है. हमारा गाँव ऐतिहासिक है, क्योंकि इसी ने दशहरी आम की प्रजाति विश्व को दिया है. हम लोग किसी भी कीमत पर अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं.''

सभा में घोषणा की गई कि आगामी 11 जुलाई से किसान लखनऊ विकास प्राधिकरण कार्यालय पर और उसके बाद जिला कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन करेंगे.

सरकार ने लखनऊ विकास प्राधिकरण की सिफारिश पर दशहरी, सलेमपुर पतौरा और रायपुर गाँवों की लगभग 90 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की है.

किसानों को चार लाख साठ हजार रुपए एकड़ मुआवजा देने का आदेश हुआ है, जबकि यहाँ की जमीने कई गुना महंगी हैं.

लखनऊ नगर के मेयर डाक्टर दिनेश शर्मा ने सरकार से प्रस्तावित कूड़ाघर का स्थान बदलने के लिए कहा है. मगर सरकार ने अभी तक उस पर ध्यान नहीं दिया.

इस परियोजना को अभी पर्यावरण विभाग से अनुमति का भी इंतज़ार है. इसके बाद उद्यान एवं वन विभाग से पेड़ काटने की अनुमति भी लेनी होगी.

हालांकि जानकार लोगों का कहना है कि चूँकि यह योजना सरकार के उच्च स्तर से मंजूर हुई है इसलिए इन विभागों के अधिकारी भी देर सबेर अपनी मुहर लगा देंगे. ऐसे में केवल अदालत ही हस्तक्षेप कर सकती है.

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