माओवादियों का दो दिनों का बंद

नक्सली
Image caption नक्सलियों ने आर्थिक नाकेबंदी की भी घोषणा की है

अपने वरिष्ठ साथी चेरुकुरी राजकुमार यानी आज़ाद के कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मारे जाने के विरोध में माओवादियों ने सात राज्यों में 48 घंटे के भारत बंद का आयोजन किया है.

बंद मंगलवार को रात 12 बजे से शुरु हो चुका है.

केंद्र और राज्य सरकारों ने बंद को ध्यान में रखते हुए हाईअलर्ट की घोषणा की है और सुरक्षा बलों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने के आदेश दिए हैं.

रेलवे ने भी सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं.

हालांकि माओवादियों की ओर से कहा गया है कि वे रेल को निशाना नहीं बनाएंगे.

उन्होंने दूध, दवा, सब्ज़ी, रेलवे और एंबुलेंस आदि को बंद से मुक्त रखने की घोषणा की है.

बंद

छत्तीसगढ़ में माओवादियों की दंडकारण्य ज़ोनल कमेटी के प्रवक्ता गुडसा उसेंडी ने किसी अज्ञात स्थान से बीबीसी से हुई बातचीत में कहा है कि सात और आठ जुलाई को भारत बंद का आह्वान किया गया है.

उन्होंने बताया कि इन दो दिनों में आर्थिक नाकेबंदी भी की जाएगी और इसके अलावा 14 जुलाई तक विरोध सप्ताह मनाया जाएगा.

उनका कहना है कि पुलिस ने उनके नेता चेरुकुरी राजकुमार उर्फ़ आज़ाद को नागपुर से पकड़ा था और फिर आंध्रप्रदेश के आदिलाबाद में ले जाकर फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मार दिया.

उसेंठी ने कहा, "जो सरकार लोकतंत्र और संविधान की बात करती है वह किसी क्रांतिकारी नेता को इस तरह पकड़ कर फ़र्ज़ी मुठभेड़ मारकर कहना कि वे एक मुठभेड़ में मारे गए हैं यह कहाँ को लोकतंत्र है?"

माओवादी प्रवक्ता ने कहा है कि संगठन ने तय किया है कि इस बंद के दौरान उनकी ओर से ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी जिससे आमजनता को जानमाल का नुक़सान हो.

यह पूछे जाने पर कि भारत के गृह सचिव जीके पिल्लई ने कहा है कि माओवादी समस्या को तीन से सात साल के भीतर ख़त्म कर दिया जाएगा, उन्होंने कहा, "वे पहले ऐसे व्यक्ति नहीं है जो ऐसा कह रहे हैं इससे पहले भी कई लोग ऐसी समय सीमा निर्धारित कर चुके हैं."

गुडसा उसेंडी ने कहा, "जब तक देश में असमानता, ग़रीबी, भुखमरी और बीमारी जैसी बुनियादी समस्याएँ हैं नक्सली आंदोलन को कुचलना किसी के बस की बात नहीं है."

झारखण्ड, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ जैसे माओवादी प्रभावित राज्यों में इस बंद के प्रभावी होने के आसार हैं.

रेलवे सतर्क

Image caption ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस के पटरी से उतरने से कम से कम सौ यात्रियों की मौत हो गई थी और दो सौ घायल हुए थे

माओवादियों के बंद को देखते हुए रेलवे ने सुरक्षा और सतर्कता के विशेष क़दम उठाए हैं.

बिहार, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल में कई ट्रेनों के मार्ग बदल दिए गए हैं और हर संवेदनशील स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल के जवानों सहित तुरंत कार्रवाई करने वाले दल को तैयार रखा गया है.

रेलवे अधिकारियों के अनुसार संवेदनशील इलाक़ों में हर एक्सप्रेस और सुपरफ़ास्ट ट्रेनों से आगे एक पायलेट इंजिन को चलने के निर्देश दिए गए हैं.

झारखंड में यात्री ट्रेन को निशाना बनाए जाने और हाल ही में मिदनापुर में ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस पर हुए हमले के बाद रेलवे प्रशासन माओवादी हमलों को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है.

हालांकि माओवादियों के प्रवक्ता किशनजी और गुडसा उसेंडी ने अलग-अलग बयानों में कहा है कि वे रेलवे को निशाना नहीं बनाएँगे लेकिन अधिकारी कोई मौक़ा चूकना नहीं चाहते.

केंद्रीय गृहसचिव जीके पिल्लई ने भी मंगलवार की शाम रायपुर में कहा, "किशनजी ने भी कहा है कि रेलवे को निशाना नहीं बनाएँगे."

छत्तीसगढ़, झारखंड और उडी़सा में कई मार्गों पर मालवाहक ट्रकों का आवागमन भी इस बंद की वजह से रुक गया है.

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