बिहार में बंद का व्यापक असर

एक प्रदर्शनकारी

महंगाई और राज्य सरकार की विफलताओं के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय जनता दल और लोकजनशक्ति पार्टी के बंद का बिहार में ख़ासा असर रहा.

प्रदर्शनकारियों ने कई जगह ट्रेनों को रोककर धरना दिया जिससे रेल सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हुई. राष्ट्रीय और राजकीय राजमार्गों पर भी प्रदर्शनकारियों ने यातायात रोककर प्रदर्शन किया.

करीब 11 हज़ार लोगों को गिरफ़्तार किया गया. पटना में लालू प्रसाद और रामविलास पासवान समेत कई नेताओं ने भी गिरफ़्तारी दी.

लालू की राष्ट्रीय जनता पार्टी और पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह जमाखोरों और मुनाफ़ाखोरों को संरक्षण दे रही है.

उनका आरोप है कि केंद्र सरकार की सरकार महंगाई के लिए जितनी ज़िम्मेदार है उससे कहीं अधिक राज्य की सरकार है.

राष्ट्रीय जनता दल के रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा, "अगर केंद्र सरकार मूल्य वृद्धि को नहीं रोक पा रही है तो पूरे राष्ट्र की मांग है कि सरकार सत्ता से हट जाए."

महंगाई के ख़िलाफ़ पिछले हफ़्ते हुए विपक्ष के बंद के बाद इसी मुद्दे पर बिहार में यह बंद आयोजित किया गया. लेकिन इस बार महंगाई के लिए केंद्र के अलावा राज्य सरकार को भी दोषी ठहराया जा रहा है.

इसके अलावा राज्य में बिजली के संकट, घूसखोरी और भ्रष्टाचार को भी मुद्दा बनाया गया है.

प्रदर्शनकारियों ने पटना, हाजीपुर, जहानाबाद, भागलपुर, बक्सर, सहरसा और मुज़फ़्फ़रपुर में ट्रेनों को रोककर उसके सामने धरना प्रदर्शन किया.

सड़कों पर चक्काजाम किए जाने से सड़क यातायात भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ.

प्रदर्शनकारियों ने सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के अलावा राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ नारे लगाए.

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