महँगी पड़ सकती है मुर्ग़े की बाँग

यूँ तो किसी को जगाने के लिए हम अलार्म का या घड़ी का इस्तेमाल करते हैं लेकिन राजस्थान में महँगाई के विरोध में सरकार के विरुद्ध बांग दिलवाने के लिए कुछ लोगों को मुर्गे़ की आवाज़ पसंद आई.

अब ये शगल उन्हें महंगा पड़ सकता है. राजस्थान यूथ फ्रंट के कार्यकर्ता अपने नेता के साथ शुक्रवार को दो मुर्ग़ों के साथ जयपुर में ज़िला कलेक्टर दफ़तर आए थे और महँगाई के विरोध में ज्ञापन देने का उपक्रम किया.

इन मुर्ग़ों की टाँगें बंधी हुई थीं. अब पुलिस परिंदो के साथ कथित ज़्यादती को लेकर आयोजकों के खिल़ाफ़ जाँच कर रही है.

कलेक्टर कुलदीप रांका को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने बिना मुर्गों के ज्ञापन देने के लिए कार्यकर्ताओं को बुलाया.

कलेक्टर ने मुर्गों के साथ ज्ञापन देने की अनुमति नहीं दी. इस विरोध प्रदर्शन में बेज़ुबान परिंदे बंधी टांगों से इंसानों के हाथों में फड़फड़ाते रहे.

आयोजकों को इसमें कुछ भी बुरा नहीं लगा. मगर कुछ जीव प्राणियों ने इस पर कड़ी आपत्ति की और कहा कि ये क़ानून का उल्लंघन है.

मगर फ़्रंट के संयोजक नरेन्द्र दाधीच का कहना था, "मुर्गा इंसान को सदा जगाता रहा है.महंगाई बहुत ज़्यादा हो गई है. लिहाज़ा हम दो मुर्गे लेकर विरोध करने आए. एक मुर्गा प्रधानमंत्री के लिए बांग देगा और दूसरा मुख्यमंत्री के लिए. मुर्गा हमारी जीवन का हिस्सा रहा है. इसमें बुराई क्या है?"

इस बीच कलेक्टर ने पुलिस से इस पूरे मामले की जाँच के लिए कहा है.

जयपुर के पुलिस अधीक्षक ने बीबीसी से कहा, "हमें शिकायत मिली है. हम कानून के तहत इसकी जाँच कर रहे हैं.अगर ये पाया गया कि क़ानून का उल्लंघन हुआ है तो क़दम उठाए जाएँगे."

प्रशासन के इस आदेश के बाद विरोध प्रदर्शन करने वाले बचाव मुद्रा में आ गए हैं.वैसे तो मुर्गा पोल्ट्री फ़ार्म में रहता है.मगर यहाँ उसे अचानक राजनीति में ले आया गया है.

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