ताज में शाहजहाँ का 355वाँ उर्स

ताज महल

चंडीगढ़ से आए सरदार जगमोहन सिंह और दिल्ली से आए मौलाना जफ़र बेग ने ताज महल तो कई बार देखा था लेकिन हर बार उनकी मुमताज़ और शाहजहाँ की असली क़ब्रें देखने की हसरत पूरी नहीं हो पाती थी.

शुक्रवार को ताजमहल पर उर्स के शुरु होते ही उन्होंने तहख़ाने में जाकर असली क़ब्रों के दीदार किए. ऐसे कई पर्यटक शुक्रवार को ताज महल में थे जो केवल तहख़ाने में स्थित असली क़ब्रों को देखना चाहते थे.

मुग़ल साम्राज्य के बादशाह शाहजहाँ का तीन दिवसीय उर्स शुक्रवार से ताजमहल में शुरु हो गया. शाहजहाँ के 355वें उर्स के अवसर पर ताज महल के तहख़ाने में स्थित मुमताज़ महल और शाहजहाँ की असली क़ब्रों को तीन दिनों तक आम जनता देख सकती है.

साल में एक बार

हालाँकि नौ जुलाई को शुकवार था. शुक्रवार को ताजमहल केवल नमाज़ अदा करने वालों के लिए खोला जाता है. लेकिन उर्स के कारण पर्यटकों को ताज के साथ-साथ असली क़ब्रों को भी देखने का मौक़ा मिल गया.

शाहजहाँ और मुमताज़ की असली क़ब्रों वाला तहख़ाना सुरक्षा के कारण से बंद कर दिया गया है पर उर्स के अवसर पर वर्ष में एक बार इसे कड़ी सुरक्षा के बीच आम पर्यटकों के लिए खोला जाता है. इन तीन दिनों में ताज महल में प्रवेश भी निशुल्क रहता है.

शाहजहाँ के उर्स के अवसर पर दोपहर दो बजे ख़ुद्दाम-ए-रौज़ा कमेटी के प्रधान ताहिरुद्दीन ताहिर, हाजी मिर्ज़ा सागर बेग और नूर मोहम्मद ने सुरक्षा के बीच लगभग एक वर्ष बाद तहख़ाने में स्थित शाहजहाँ और मुमताज़ की असली क़ब्रों के द्वार खोले.

इसके बाद शाही ग़ुस्ल की रस्म अदा की गई. इसमें गुलाब और केवड़े के पानी से शाहजहाँ के क़ब्र पर ग़ुस्ल की रस्म अदा कर उन्हें ग़िलाफ़ पहनाया गया. मिलाद-ए-शरीफ़ और क़व्वालियों की रस्में भी हुई.

इसके बाद तहख़ाने को आम जनता के देखने के लिए खोल दिया गया.

ताजमहल पर कई पर्यटक सिर्फ़ इन्ही क़ब्रों को देखने के लिए ही आए थे.

उर्स के दूसरे दिन यानी 10 जुलाई को संदल शरीफ़, क़ुरानख़ानी और क़व्वालियों की रस्म अदायगी के बाद इन क़ब्रों को दोपहर दो बजे के बाद फिर आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा.

सर्वधर्म की चादर

उर्स के अंतिम दिन का विशेष आकर्षण होगा क़ब्रों पर चादर पोशी की रस्म. इस दिन लगभग 75-80 चादरें शाहजहाँ की असली क़ब्र पर चढ़ाई जाएँगी.

उर्स के अंतिम दिन दो चादरें विशेष रहेंगी जिसमें ख़ुद्दाम-ए-रौज़ा कमेटी द्वारा 450 मीटर लंबी सर्व धर्म की चादर और ताजगंज की शाही फ़तेहपुरी मस्जिद के मुतवल्ली सयैद ख़ान के नेतृत्व में 350 मीटर लंबी चादर चढ़ाई जाएगी.

शाहजहाँ के वंशज प्रिंस तूसी भी इस दौरान मोजूद रहेंगे.

ख़ुद्दाम-ए-रौज़ा कमेटी के प्रधान ताहिरुद्दीन ताहिर ने बीबीसी को बताया, "ये 450 मीटर लंबी चादर हिंदुस्तान की सतरंगी सर्वधर्म की चादर है. इसमें हर धर्म और मज़हब का रंग शामिल है. यह चादर पूरे संसार में एक संदेश देती है."

सभी धर्मों के धर्म गुरु मिलकर इस चादरपोशी की रस्म को अदा करेंगे. उर्स के दौरान ताजमहल की सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है. इन दिनों में लाखों लोगों के ताज महल आने की संभावना है.

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