कृष्णा देवराया की याद में

  • 13 जुलाई 2010
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और के रोसय्या
Image caption प्रतिभा पाटिल ने कहा कि कृष्णा देवराया आज के शासकों के लिए भी एक मिसाल हो सकते हैं.

आंध्र प्रदेश सरकार दक्षिण भारत के इतिहास के एक लोकप्रिय सम्राट श्री कृष्ण देवराया की ताजपोशी की 500वीं सालगिरह पर एक महोत्सव मना रही है.

हाल ही में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने हैदराबाद में इस महोत्सव का उदघाटन किया. राष्ट्रपति ने इस मौक़े पर कहा था कि कृष्ण देवराया आज के शासकों के लिए भी एक मिसाल हैं.

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कहा, “हमारा सौभाग्य है कि देश की प्रगति करते समय हम इतिहास की उन हस्तिओं से प्रेरणा ले सकते हैं जिन्होंने जनता के कल्याण के लिए आदर्श लगन और वचनबद्धता दिखाई थी.”

राष्ट्रपति ने इस अवसर पर कृष्णा देवराया की एक मूर्ति का भी अनावरण किया.

कृष्णा देवराया ने विजयनगर साम्राज्य पर सोलहवीं शताब्दी में राज किया था. उनके काल में विजयनगर साम्राज्य पूर्व में कटक से लेकर पश्चिम में गोवा तक और उत्तर में रायचूर से लेकर दक्षिण में हिंद महासागर तक फैला हुआ था.

उस विशाल राज्य में मौजूदा कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडू, केरल के अलावा गोवा और उड़ीसा के कुछ हिस्से भी शामिल थे.

संस्कृति

इतिहास में कृष्ण देवराया के काल का आंध्र प्रदेश के साहित्य और संस्कृति में विशेष स्थान है. तिरुपति स्थित तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम की स्थापना भी उन्हीं के काल में हुई थी.

Image caption राष्ट्रपति ने कृष्णा देवराया की मूर्ति का अनावरण किया.

दूसरी ओर कला-संस्कृति, साहित्य और लेखकों के सरपरस्त के रूप में उन्होंने तेलुगू भाषा के प्रोत्साहन में भी एक अहम भूमिका निभाई थी. उन्हें अपने राज्य में सिंचाई व्यवस्था के प्रबंध करने के लिए भी जाना जाता है.

कृष्णादेव राया ने हांपी के अलावा आंध्र प्रदेश के मौजूदा अनंतपुर ज़िले में स्थित पेनुगोंद को अपनी दूसरी राजधानी बनाया था.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रोसय्या ने कहा है कि एक महीने तक चलने वाले महोत्सव का समापन कार्यक्रम पेनुगोंद में होगा. साथ ही उन दस ज़िलों में रथ यात्राएं भी निकाली जाएंगीं जो कभी विजयनगर राज्य का हिस्सा रहे थे.

पड़ोसी राज्य कर्नाटक में भी ये महोत्सव शुरू हो चुका है.

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