आंध्रा में पुलिस फायरिंग में चार की मौत

आंध्र प्रदेश में धान की रोपाई
Image caption स्थानीय किसानों का कहना है कि बिजली घर परियोजना से प्रदूषण बेक़ाबू हो जाएगा

आंध्र प्रदेश के तटवर्ती ज़िले श्रीकाकुलम में एक बड़े बिजली घर की योजना को लेकर सरकार और स्थानीय किसानों के बीच गत कई महीनों से चल रहेटकराव ने बुधवार को हिंसात्मक मोड़ ले लिया.

सोम्पेट में प्रदर्शन करने वाले किसानों और मछुआरों की पुलिस के साथ भिडंत हो गई और पुलिस ने गोली चलादी जिसमें कम से कम चार लोगों की मृत्यु हो गई है.

गोली लगने से घायल दो और लोगों की हालत नाज़ुक है. इसी तरह हिंसा में घायल एक पुलिस कर्मी की हालत भी ख़राब है. हिंसा में कुल मिलाकर एक सौ से भी ज़्यादा लोग घायल हुए हैं. गृहमंत्री एसआई रेड्डी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के पथराव और हमले में 47 पुलिस कर्मी घायल हुए हैं.

आंदोलनकारियों ने पुलिस की दो जीपों और कई दूसरे वाहनों को भी आग लगा दी और उस नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी के कार्यालय पर भी हमला किया जो कोयले से बिजली बनाने के इस कारख़ाने का निर्माण करने वाली है. सोम्पेट में देर रात तक भी स्थिति तनावपूर्ण थी. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस देर रात तक गलियों में घूम रही थी और लोगों को पीट रही थी. इस इलाके में गत दो-तीन दिन से तनाव बढ़ गया था क्योंकि ऐसी अफवाहें गर्म थीं की सरकार किसानों की ज़मीनें ज़बरदस्ती वाली है. बुधवार को जब उस इलाके में सैकड़ों पुलिस कर्मी जमा हो गए तो किसान-मछुआरे और दूसरे लोग भी अपने खेतों में जमा हो गए.

तनाव बढ़ते-बढ़ते हिंसा की नौबत आ गई और हरे-भरे खेत जैसे युद्ध के मैदान में बदल गए.

मुद्दा प्रदूषण है

किसानों के पथराव के जवाब में पुलिस ने भी प्रदर्शनकारियों की बुरी तरह पिटाई की. पुलिस की पिटाई का शिकार होने वालों में अनेक महिलाऐं भी थीं. पत्थर लगने से कई लोगों के सर फट गए.

स्थानीय लोगों का कहना है कि वो इस परियोजना का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इससे होने वाला प्रदूषण वहाँ की कृषि भूमि को नष्ट कर देगा और भूमि गत पानी भी प्रदूषित हो जाएगा जिसके बाद उनके पास पीने को पानी भी नहीं रहेगा. इस प्लांट के लिए 517 एकड़ भूमि की ज़रुरत है.

लोगों की आपत्ति को देखते हुए केंद्र सरकार के पर्यावरण विभाग के ट्राइब्यूनल ने इस इलाके में एक सार्वजनिक सुनवाई भी की थी लेकिन उस ने अब तक अपनी रिपोर्ट नहीं दी है उस के बावजूद इस प्लांट पर काम शुरू क्या जा रहा था.

अब मुख्यमंत्री ने हिंसा को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए संकेत दिया कि सरकार इस परियोजना पर दोबारा विचार करेगी. इधर विपक्षी दलों ने पुलिस फायरिंग की कड़ी निंदा की है. उन्होंने शाम को विधान सभा की करवाई नहीं चलने दी. वो सरकार से इस घटना पर बयान देने की मांग कर रहे थे.

बाद में उपाध्यक्ष ने तमाम विपक्षी सदस्यों को सदन से निलंबित कर दिया लेकिन उन्होंने सदन के बाहर अपना विरोध प्रदशन जारी रखा. विपक्ष के नेता चन्द्र बाबू नायडु गुरुवार को सोम्पेट की यात्रा करके स्थानीय किसानों, मछुआरों और अन्य लोगों से सहानभूति प्रकट करने वाले हैं.

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