भारत के बिना समाधान स्वीकार्य नहीं

गुप्ता
Image caption भारत हमेशा से कहता रहा है कि अफ़गानिस्तान मामले में उसकी भूमिका रहनी चाहिए.

भारतीय विदेश मंत्राल की राय में भारत को साथ लिए बिना अफ़गानिस्तान मामले का कोई भी समाधान उसे स्वीकार्य नहीं होगा.

विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह बात ऐसे समय में कही है जब अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर आए हुए हैं और वो वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात करने वाले हैं.

भारतीय विदेश मंत्रालय और नीति नियामक संस्थाएं इस एजेंडे पर बिल्कुल एकमत हैं और जोंस के समक्ष भी अधिकारी अफ़गानिस्तान के मामले में यही राय रखने वाले है.

भारत का मानना है कि पिछले कुछ महीनों से अफ़गानिस्तान मामले में उसे ‘बिल्कुल महत्व नहीं दिया जा रहा है.’

उल्लेखनीय है कि मार्च महीने में अमरीका सरकार ने पाकिस्तान के साथ उच्च स्तरीय बातचीत की थी जिसके बाद लंदन और इस्तांबूल में अफ़गानिस्तान के मामले पर सम्मेलन हुआ जिसमें संदेश यही था कि भारत को बिल्कुल अलग थलग रखा जाए

विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव डॉक्टर अरविंद गुप्ता कहते हैं, " चूँकि अफ़ग़ानिस्तान में जारी युद्ध और अपने हितों को साधने के लिए अमरीका को पाकिस्तान के सहयोग की ज़रूरत है. अमरीका पाकिस्तान को नाराज नहीं करना चाहता. और पाकिस्तान नहीं चाहता कि भारत की कोई भूमिका अफ़गानिस्तान में हो."

गु्प्ता इस समय इंस्टीच्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज़ एंड एनालिसिस (आईडीएसए) से जुड़े हुए हैं जहाँ वे अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से जुड़े मसलों पर सरकार को सलाह देते हैं.

वो कहते हैं, "मैं समझता हूँ कि ये सारी बातें जेम्स जोंस के साथ बातचीत में सामने आएंगी."

गु्प्ता कहते हैं कि भारत अफ़ग़ानिस्तान में नवनिर्माण का काम जारी रखना चाहिए लेकिन उसे सैन्य गतिविधियों से खुद को दूर रहना चाहिए.

गुप्ता कहते हैं, " सैन्य गतिविधियों में भारत को हिस्सा नहीं लेना चाहिए.वहां पहले ही अमरीका और नैटो इतनी तैयारी के साथ है फिर भी उनकी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. ऐसे में भारत को सैन्य गतिविधियों से दूर रहना चाहिए."

आईडीएसए के निदेशक एनएस सिसोदिया का कहना है कि भले ही भारत को अफ़ग़ानिस्तान मामलों में उपेक्षित किया जा रहा हो, अफ़गानिस्तान में भारतीयों को लोग काफ़ी पसंद करते हैं और वहाँ भारत अपना काम जारी रखेगा.

सिसोदिया का मानना है कि दिसंबर में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा से पहले जेम्स जोंस की यह यात्रा विभिन्न मुद्दों पर बातचीत के लिए ज़मीन तैयार करने वाली होगी.

ग़ौरतलब है कि भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में करीब एक अरब 30 करोड़ डॉलर का निवेश किया है.

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