खैरलांजी: हाईकोर्ट ने सज़ा घटाई

  • 15 जुलाई 2010
दलित महिलाएँ (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption सरकार ने कहा है कि वह फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट जाएगी

बॉम्बे हाईकोर्ट के नागपुर पीठ ने खैरलांजी के चर्चित दलित हत्याकांड के मामले में मौत की सज़ा पाए सभी छह अभियुक्तों की सज़ा को घटाकर आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया है.

भंडारा ज़िले की एक सत्र अदालत ने 24 सितंबर, 2008 को हत्याकांड की सुनवाई के बाद छह लोगों को मौत की सज़ा सुनाई थी और दो अन्य लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा दी थी.

इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अभियुक्तों की ओर से हाईकोर्ट में अपील की गई थी.

खैरलांजी में वर्ष 2006 में एक दलित परिवार के चार लोगों की हत्या कर दी गई थी. इस मामले में 11 लोगों के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दाखिल हुआ था जिनमें से आठ को क़सूरवार पाया गया था.

बुधवार को आए इस फ़ैसले के बाद महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि वह हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट जाएगी और सभी अभियुक्तों को फांसी की सज़ा दिए जाने की अपील करेगी.

जघन्य कांड

कुछ लोगों ने दलित किसान भैयालाल की पत्नी सुरेखा और उनके तीन बच्चों, बेटी प्रियंका और बेटे दिलीप और रौशन की गला काट कर निर्मम तरीक़े से हत्या कर दी थी.

इस हत्या के बाद दलितों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया था.

तत्कालीन राज्य सरकार ने मामला तूल पकड़ता देख इसकी जाँच सीबीआई के हवाले कर दी थी.

सीबीआई ने इसी वर्ष 27 दिसंबर को 11 लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक षडयंत्र रचने, हत्या, महिलाओं की गरिमा से खिलवाड़ करने और सबूत मिटाने की कोशिश करने का अभियोग लगाया था.

हालांकि भैयालाल ने इस हत्या के मामले में 50 लोगों का हाथ बताया था.

इस हत्या के बाद दलितों का कहना था कि उनके जीवन और प्रतिष्ठा की रक्षा करने में सरकार विफल रही है.

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