नार्को टेस्ट करवाने से इनकार

चार मीनार (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption वर्ष 2007 में मक्का मस्जिद विस्फोट हुए थे

मक्का मस्जिद बम विस्फोट के दो मुख्य संदिग्धों देवेंदर गुप्ता और लोकेश शर्मा ने अपना नार्को एनालिसिस और पॉलीग्राफ़ टेस्ट करवाने से इनकार कर दिया है.

इस चरमपंथी हमले की छानबीन कर रहे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत में अर्ज़ी दाख़िल करके इन दोनों के नार्को और पॉलीग्राफ़ टेस्ट करवाने की अनुमति मांगी थी.

इस पर जज ने इन दोनों से पूछा कि क्या उन्होंने इसके लिए मंज़ूरी दे दी है.

दोनों संदिग्धों ने, जो गत दो तीन सप्ताह से सीबीआई की हिरासत में पूछताछ का सामना कर रहे हैं, अदालत से कहा कि वो यह टेस्ट करवाने के लिए तैयार नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि वो जो कुछ जानते हैं वो सब उन्होंने सीबीआई को बता दिया है और अब उन के पास कहने के लिए कुछ भी नहीं है. जज ने अभी इस मामले पर अपना फैसला नहीं सुनाया है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के अनुसार अब उनका टेस्ट करवाना संभव नहीं दिखता.

इस वर्ष मई में सुनाए गए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी भी संदिग्ध को नार्को और पॉलीग्राफ़ टेस्ट करवाने पर मजबूर करना असंवैधानिक है.

सीबीआई ने अदालत से कहा था कि वो इन टेस्ट के ज़रिए कुछ ऐसी बातों की पुष्टि करना चाहती है जो इन दोनों ने उसे पूछताछ के दौरान बताई थीं. देवेंदर गुप्ता और लोकेश शर्मा मक्का मस्जिद के अलावा अजमेर की दरगाह में भी विस्फोट के मामले में भी अभियुक्त हैं.

इन दोनों को अदालत ने 27 जुलाई तक के लिए न्यायिक हिरासत में दे दिया है और दोनों को एक बार फिर हैदराबाद की चंचलगुडा जेल में वापस भेज दिया गया है. सीबीआई देवेंदर गुप्ता से पूछताछ करने के अलावा उन दूसरे शहरों में भी ले गई जहां कथित तौर पर हैदराबाद की मस्जिद में चरमपंथी हमले का षडयंत्र रचा गया और दूसरी तैयारियाँ की गईं. सीबीआई अभी इस मामले में दो और संदिग्धों संदीप डांगे और रामचंद्र को ढूंढ रही है. इन पर दस-दस लाख का इनाम भी रखा गया है.

सीबीआई का कहना है कि देवेंदर गुप्ता और लोकेश शर्मा के संबंध आरएसएस से हैं.

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