जेठवा हत्याकांड में भाजपा नेता पर आरोप

  • 21 जुलाई 2010
अमित जेठवा
Image caption अमित जेठवा ने बहुत सी जनहित याचिकाएँ भी लगाईं

अहमदाबाद में सूचना के अधिकार के अवैध खनन के कई मामले उजागर करने वाले कार्यकर्ता अमित जेठवा के पिता ने कहा है कि उनके बेटे की हत्या के पीछे भारतीय जनता पार्टी के एक सांसद का हाथ है.

अमित जेठवा ने सूचना के अधिकार के तहत गीर के जंगलों में अवैध खनन के मामले सामने लाए थे. मंगलवार को उनकी गोलीमार कर हत्या कर दी गई थी.

पुलिस ने आशंका जताई है कि इसके पीछे खनन माफ़िया का हाथ हो सकता है.

लेकिन अमित के पिता भीखू भाई ने पुलिस से दर्ज की गई शिकायत में कहा है कि हत्या के पीछे भाजपा नेता का हाथ है.

भीखू भाई ने इस मामले की जाँच सीबीआई को सौंपे जाने की मांग करते हुए कहा है कि चूंकि मामला भाजपा के सांसद से जुड़ा है, इसलिए उन्हें लगता है कि राज्य की भाजपा सरकार के मातहत काम करने वाली पुलिस निष्पक्षता से जाँच नहीं करेगी.

बीबीसी ने इस भाजपा सांसद से बात करने का प्रयास किया ताकि इस मामले में उनका पक्ष लिया जा सके लेकिन वे फ़ोन पर उपलब्ध नहीं हुए.

हत्या

पुलिस अधिकारियों के अनुसार अमित जेठवा को मंगलवार की रात क़रीब पौने आठ बजे दो लोगों ने गोली मार दी थी.

उस समय वे हाईकोर्ट के नज़दीक बार काउंसिल से अपने वकील से मिलकर निकल रहे थे.

पास ही एक एटीएम में मौजूद प्रत्यक्षदर्शी के हवाले से पुलिस ने कहा है कि जब अमित जेठवा बाहर निकले तो मोटर साइकिल पर दो लोग उनका इंतज़ार कर रहे थे.

प्रत्यक्षदर्शी का कहना है कि एक व्यक्ति ने मोटर साइकिल से उतरकर जेठवा को पीछे से पकड़ लिया और फिर दूसरे व्यक्ति ने उन्हें गोली मार दी.

पुलिस के अनुसार इन दोनों व्यक्तियों ने चाकू भी निकाला लेकिन एक व्यक्ति के यह कहने के बाद कि जेठवा की जान जा चुकी है, उन्होंने चाकू का प्रयोग नहीं किया.

पुलिस का कहना है कि इसके बाद प्रत्यक्षदर्शी के वहाँ आ जाने की वजह से वे अपनी मोटरसाइकिल और अपनी देसी पिस्तौल वहीं छोड़कर भाग निकले.

सूचना कार्यकर्ता

Image caption अमित जेठवा की वजह से अवैध खनन के कई मामले उजागर हुए

42 वर्षीय अमित जेठवा एक सरकारी कर्मचारी थे लेकिन 1995-96 में उन्हें बर्ख़ास्त कर दिया गया था.

इसके बाद वे गीर के जंगलों में चल रहे अवैध खनन और कई अन्य अनियमितताओं के ख़िलाफ़ लड़ाई में लग गए थे.

अमरेली और जूनागढ़ ज़िले में फैले गीर के जंगल एशियाई शेरों के लिए विख्यात हैं.

स्थानीय पत्रकार बताते हैं कि अवैध खनन की उनकी शिकायतों की वजह से कई बड़े मामले उजागर हुए.

उनका कहना है कि एक सीमेंट कंपनी को ख़ास तौर पर इसकी वजह से काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ा.

अमित जेठवा ने हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएँ भी लगाईं जिससे कई कंपनियों को दिक़्क़त का सामना करना पड़ा.

उन्होंने कोडीनार लोकसभा क्षेत्र के भाजपा सांसद दीनू भाई सोलंकी के ख़िलाफ़ भी अवैध खनन की शिकायत की थी जिसकी वजह से उन पर एक बार 40 लाख रुपए का जुर्माना भी किया गया था.

अमित जेठवा ने पिछले चुनाव में दीनू भाई सोलंकी के ख़िलाफ़ कोडीनार लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी की तरह चुनाव भी लड़ा था.

डेढ़ साल पहले अमति जेठवा पर हुए एक घातक हमले के बाद उन्होंने इस हमले के लिए दीनू भाई सोलंकी और उनके परिजनों पर आरोप लगाए थे.

आरोप

दिव्य भास्कर के कार्यकारी संपादक अजय उमठ का कहना है कि हालांकि अमित जेठवा ने अवैध खनन सहित कई मामलों में तारीफ़ के क़ाबिल काम किया लेकिन पिछले कुछ समय से उनकी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए जाने लगे थे.

उनका कहना है कि कई कंपनियों और व्यक्तियों ने यह आरोप लगाया है कि अमित जेठवा ने सूचनाओं का दुरुपयोग करके उनको धमकाने का प्रयास किया.

अजय उमठ का कहना है कि हाईकोर्ट ने भी उनकी कई जनहित याचिकाओं को यह कहकर ख़ारिज कर दिया था कि उसमें जनहित नहीं दिखता.

अमित जेठवा एक दलित थे और उन्होंने कई लोगों के ख़िलाफ़ उत्पीड़न के मामले भी दर्ज कराए थे. इसे भी लेकर कई बार सवाल खड़े किए गए.

दिव्य भास्कर के संपादक का कहना है कि एक पूर्व सरकारी कर्मचारी अमित जेठवा की जीवन शैली को लेकर भी बहुत लोग सवाल खड़े करते रहे हैं.

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