बंगाल सरकार को ममता की खुली चुनौती

  • 21 जुलाई 2010
ममता बनर्जी की रैली

केंद्रीय रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने बुधवार को कोलकाता में एक रैली का आयोजन किया जिसमें लाखों लोगों के शामिल होने का दावा किया गया.

ये रैली 21 जुलाई 1993 को युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर पुलिस की गोलीबारी की याद में निकाली गई.

उस दिन उन कार्यकर्ताओं ने एक जुलूस की शक्ल में राइटर्स बिल्डिंग में घुसने की कोशिश की थी और उन्हें रोकने की कोशिश करते हुए पुलिस की गोलीबारी में 13 कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी.

उस जुलूस का नेतृत्व ख़ुद ममता बनर्जी ने किया था जो उस समय बंगाल युवा कांग्रेस की अध्यक्ष थीं.

इस वर्ष ममता बनर्जी ने दावा किया कि इस रैली में रिकॉर्ड संख्या में कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.

रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं को अगले वर्ष होने वाले चुनावों में राज्य की वामपंथी सरकार को हराने के लिए तैयारी कर लेनी चाहिए.

खुली चुनौती

पश्चिम बंगाल राज्य के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भी इस रैली में मौजूद थे और उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने का आहवान भी किया, हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि दोनों पार्टियों में कुछ मुद्दों पर मामूली मतभेद भी हैं.

Image caption इस रैली में राज्य के वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी शामिल हुए.

ममता बनर्जी ने राज्य सरकार और प्रशासन तंत्र को चेतावनी के अंदाज़ में ये भी कहा कि वो कोई भी ऐसा काम ना करें जो न्यायसंगत ना हो क्योंकि आने वाली सरकार उन सभी फ़ैसलों और कार्यक्रमों की समीक्षा करेगी.

ममता बनर्जी के इस अंदाज़ को राज्य सरकार के लिए एक खुली चुनौती समझा जा रहा है.

संवादाताओं का कहना है कि ममता बनर्जी इस रैली को संबोधन के दौरान आत्मविश्वास से भरपूर नज़र आईं और रेल मंत्री के रूप में उनके कार्यकलाप की आलोचना से वो ज़रा भी विचलित नहीं हुईं.

ग़ौरतलब है कि हाल के समय में कुछ भीषण रेल दुर्घटनाएँ हुई हैं जिनके लिए ममता बनर्जी की भी आलोचना की जा रही है.

इसके उलट ममता बनर्जी ने रेल दुर्घटनाओं के पीछे कोई गहरी साज़िश बताया और कहा कि जाँच पड़ताल में असली दोषियों का पता तो चल ही जाएगा.

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