अमित शाह समेत 15 के ख़िलाफ़ आरोप पत्र

अमित शाह और नरेंद्र मोदी
Image caption अमित शाह मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के क़रीबी बताए जाते हैं

सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले की जाँच कर रहे केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने अचानक शुक्रवार को आरोप पत्र दाख़िल कर दिया है.

इस आरोप पत्र में गुजरात में नरेंद्र मोदी सरकार में गृहराज्यमंत्री अमित शाह के अलावा कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और दो बैंक अधिकारियों सहित 15 लोगों को इस मामले में शामिल बताया गया है और उन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

सीबीआई ने दो सिपाहियों और एक इंस्पेक्टर को इस मामले से मुक्त करते हुए उनके नाम आरोप पत्र से हटा दिए हैं.

दूसरी ओर अमित शाह की ओर से एक अन्य अदालत में अग्रिम ज़मानत की याचिका दायर की थी जिसे अदालत ने ख़ारिज कर दिया है.

जानकार लोगों का कहना है कि आरोप पत्र दाख़िल होने के बाद सीबीआई के लिए अमित शाह की गिरफ़्तारी का रास्ता साफ़ हो गया है.

इससे पहले सीबीआई ने दो बार समन जारी करके अमित शाह को पूछताछ के लिए पेश होने को कहा था.

अमित शाह ने पहले तो शुक्रवार को सीबीआई के सामने पेश होने की बात कही थी लेकिन ऐन वक़्त पर उन्होंने अपने वकील को भेजकर प्रश्नावलि और समय मांगा था.

सीबीआई ने उनके दोनों अनुरोध ख़ारिज कर दिए थे और फिर शाम होते-होते उसने आरोप पत्र दाखिल कर दिया.

सोहराबुद्दीन के कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मारे जाने के मामले में राज्य सरकार की जाँच से असंतुष्ट सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जाँच सीबीआई को सौंपी थी.

आरोप पत्र

Image caption आरोप पत्र में अमित शाह सहित सभी 15 लोगों के ख़िलाफ़ गंभीर आरोप लगाए गए हैं

सीबीआई ने अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश की अदालत में सोहराबुद्दीन के कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मारे जाने और उनकी पत्नी क़ौसर बी की हत्या के मामले में पहला आरोप पत्र दाखिल किया.

सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल करते हुए कहा कि चूंकि उन्हें सुप्रीम कोर्ट को इस मामले की जाँच पर रिपोर्ट देनी है इसलिए जल्दी आरोप पत्र दाख़िल करना चाहते हैं. इससे पहले सीबीआई ने संकेत दिए थे कि वह 26 जुलाई तक आरोप पत्र पेश करेगी.

आरोप पत्र में नरेंद्र मोदी के क़रीबी और उनके मंत्रिमंडल में गृहराज्यमंत्री अमित शाह का भी नाम लिया गया है और कहा गया है कि सीबीआई के पास उनके ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत हैं.

दिल्ली में सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि इसके अलावा जिन लोगों के नाम आरोप पत्र में शामिल किए गए हैं उनमें एक पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी), दो पुलिस अधीक्षक (एसपी), दो पुलिस उप अधीक्षक (डीएसपी), तीन निरीक्षक (इंस्पेक्टर), तीन उप निरीक्षक (सब इंस्पेक्टर), गुजरात अपराध शाखा के डीसीपी और एडीसी बैंक के दो शीर्ष अधिकारी शामिल हैं.

प्रवक्ता के अनुसार 201, 302, 365, 368 और 384 के तहत आरोप लगाए गए हैं जो हत्या, अपहरण, सबूत नष्ट करना और प्रताड़ना की धाराएँ हैं.

लेकिन दूसरी ओर सेशन कोर्ट में न्यायमूर्ति जीके उपाध्याय की अदालत में अमित शाह की ओर से उनके वकील मितेश अमीन ने अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी लगाई थी जिसे अदालत ने ख़ारिज कर दिया है.

अहमदाबाद में दिव्य भास्कर के कार्यकारी संपादक अजय उमठ का कहना है कि आरोप पत्र के बाद एक तो सीबीआई को यह अधिकार मिल गया है कि वह कभी भी अमित शाह को गिरफ़्तार कर ले और दूसरे इसके बाद अग्रिम ज़मानत का केस अपने आप कमज़ोर हो गया था.

मामला

Image caption सोहराबुद्दीन शेख़ वर्ष 2005 में मारे गए थे

वर्ष 2005 में सोहराबुद्दीन शेख़ मारे गए थे. उस समय ये दावा किया गया था कि सोहराबुद्दीन शेख़ गुजरात और राजस्थान पुलिस के साथ हुए मुठभेड़ में मारे गए थे.

आरोप ये भी है कि सोहराबुद्दीन शेख़ के अलावा उनकी पत्नी कौसर बी और तुलसी प्रजापति को एक बस स्टैंड से अगवा किया गया था.

आरोप है कि कौसर बी को भी मार दिया गया है, लेकिन उनका शव तो अब तक बरामद नहीं हुआ है. एक साल बाद तुलसी प्रजापति भी कथित फ़र्जी मुठभेड़ में मारे गए.

बाद में कई जाँच से यह बात सामने आई कि सोहराबुद्दीन शेख़ को फ़र्जी मुठभेड़ में मारा गया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस साल के शुरू में इस मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी थी.

सीबीआई का दावा है कि उसके पास अमित शाह के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत हैं.

दूसरी ओर एक बयान जारी करके अमित शाह ने कहा है कि उन्होंने कुछ भी ग़लत नहीं किया है. अमित शाह ने कहा है कि उन्हें जिस तरह जल्दबाज़ी में नोटिस जारी किया गया है, उससे यही शक़ होता है कि इसमें राजनीतिक दखलंदाज़ी है.

आरोप है कि गृह राज्य मंत्री अमित शाह उन दाग़ी पुलिस अधिकारियों के साथ संपर्क में थे, जिन पर सोहराबुद्दीन को फ़र्जी मुठभेड़ में मारने का आरोप है.

इनमें से कई अधिकारी इस समय जेल में बंद हैं. इनमें प्रमुख हैं अभय चूडासमा, डीजी वंज़ारा और राजकुमार पांडियन.

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