शाह को और समय देने से इनकार

अमित शाह
Image caption भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र सरकार पर सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाया है

सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले की जाँच कर रहे केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुजरात के गृहराज्यमंत्री अमित शाह को और समय देने से इनकार कर दिया है.

अमित शाह ने अपने वकील मितिश अमीन के माध्यम से सीबीआई से अनुरोध किया था कि उन्हें सीबीआई के सामने पेश होने के लिए और समय दिया जाए लेकिन सीबीआई ने इस अनुरोध को ख़ारिज कर दिया है.

पहले अमित शाह ने सीबीआई के सामने पेश होने की घोषणा कर चुके थे लेकिन ऐन वक़्त पर उन्होंने सीबीआई के सामने पेश न होने का फ़ैसला किया.

सीबीआई का कहना है कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि शोहराबुद्दीन को फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मारने वाले पुलिस अधिकारी अमित शाह के संपर्क में थे.

सीबीआई इस मामले में अमित शाह से पूछताछ करना चाहती है.

गुजरात के गृह राज्य मंत्री अमित शाह को मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का क़रीबी माना जाता है.

अनुरोध ख़ारिज

अमित शाह ने ख़ुद सीबीआई के सामने पेश होने की जगह अपने वकील मितिश अमीन को वहाँ भेजा था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मितिश अमीन ने सीबीआई से दो अनुरोध किए थे.

एक तो यह कि उनको सीबीआई से सामने पेश होने के लिए और समय देना चाहिए और दूसरा यह कि चूंकि यह पूरा मामला बहुत पुराना है, इसलिए सीबीआई को पहले प्रश्नावलि देनी चाहिए.

जैसा कि अमीन ने पत्रकारों को बताया, सीबीआई ने समय और प्रश्नावलि देने इनकार कर दिया है.

प्रश्नावलि के मामले में उन्होंने कहा, "सीबीआई को नहीं लगता कि उसे पूछताछ से पहले प्रश्नावलि देनी चाहिए."

यह पूछे जाने पर कि अब अमित शाह के पास क्या क़ानूनी विकल्प हैं, अमीन ने कहा, "बहुत से क़ानूनी विकल्प हैं. उनमें से एक तो यह है कि अग्रिम ज़मानत ले लें. लेकिन मैं इस मसले पर अपने मुवक्किल से चर्चा करुंगा और उसके बाद ही हम तय करेंगे कि हमें आगे क्या करना है."

मामला

Image caption सोहराबुद्दीन शेख़ वर्ष 2005 में मारे गए थे

वर्ष 2005 में सोहराबुद्दीन शेख़ मारे गए थे. उस समय ये दावा किया गया था कि सोहराबुद्दीन शेख़ गुजरात और राजस्थान पुलिस के साथ हुए मुठभेड़ में मारे गए थे.

आरोप ये भी है कि सोहराबुद्दीन शेख़ के अलावा उनकी पत्नी कौसर बी और तुलसी प्रजापति को एक बस स्टैंड से अगवा किया गया था.

आरोप है कि कौसर बी को भी मार दिया गया है, लेकिन उनका शव तो अब तक बरामद नहीं हुआ है. एक साल बाद तुलसी प्रजापति भी कथित फ़र्जी मुठभेड़ में मारे गए.

बाद में कई जाँच से यह बात सामने आई कि सोहराबुद्दीन शेख़ को फ़र्जी मुठभेड़ में मारा गया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस साल के शुरू में इस मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी थी.

सीबीआई का दावा है कि उसके पास अमित शाह के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत हैं.

दूसरी ओर एक बयान जारी करके अमित शाह ने कहा है कि उन्होंने कुछ भी ग़लत नहीं किया है. अमित शाह ने कहा है कि उन्हें जिस तरह जल्दबाज़ी में नोटिस जारी किया गया है, उससे यही शक़ होता है कि इसमें राजनीतिक दखलंदाज़ी है.

आरोप है कि गृह राज्य मंत्री अमित शाह उन दाग़ी पुलिस अधिकारियों के साथ संपर्क में थे, जिन पर सोहराबुद्दीन को फ़र्जी मुठभेड़ में मारने का आरोप है.

इनमें से कई अधिकारी इस समय जेल में बंद हैं. इनमें प्रमुख हैं अभय चूडासमा, डीजी वंज़ारा और राजकुमार पांडियन.

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