अमित शाह कांग्रेस के षड्यंत्र का शिकार हुए: मोदी

अमित शाह और नरेंद्र मोदी
Image caption अमित शाह मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के क़रीबी हैं

गुजरात के सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले में आरोप पत्र में नाम आने के बाद गुजरात के गृह राज्यमंत्री अमित शाह ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका इस्तीफ़ा स्वीकार करने की घोषणा की है.

नियमानुसार मुख्यमंत्री अब अमित शाह का इस्तीफ़ा स्वीकार करने की अनुशंसा के साथ राज्यपाल को भेजेंगे.

इससे पहले शुक्रवार को अमित शाह की अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी ख़ारिज हो गई थी. शुक्रवार को अमित शाह सीबीआई के सामने पेश होने का वादा करने के बाद, अपनी बात से पलट गए थे और पेश नहीं हुए थे.

शनिवार को दिल्ली पहुँचे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि अमित शाह कांग्रेस के षड्यंत्र का शिकार हुए हैं.

उनका कहना था, "अमित शाह पूरी तरह से निर्दोष हैं और ये राजनीति से प्रेरित मामला है. मुझे जानकारी मिली है कि अमित शाह ने इस्तीफ़ा मेरे बंगले पर पहुँचाया है. मैं दिल्ली से वापस जाकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करूँगा. मैं उनका इस्तीफ़ा स्वीकार करता हूँ. संविधान के तहत जो प्रक्रियाएँ ज़रूरी हैं उनका पालन करने के तहत मैं ऐसा कर रहा हूँ. केंद्र में कांग्रेस की सरकार सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है."

ग़ौरतलब है कि अमित शाह ने ख़ुद सार्वजनिक तौर पर अपनी सफ़ाई अब तक पेश नहीं की है लेकिन भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उनका बचाव करने में जुटा हुआ है.

सोहराबुद्दीन शेख़ मामला

वर्ष 2005 में सोहराबुद्दीन शेख़ मारे गए थे और दावा किया गया था कि वे गुजरात और राजस्थान पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए हैं. इसके बाद उनकी पत्नी कौसर बी और मामले के एक प्रत्यक्षदर्शी तुलसी प्रजापति को एक बस स्टैंड से अगवा किया गया था.

जहाँ कौसर बी का अब तक कोई अता-पता नहीं है और न ही उनका शव बरामद हुआ है, वहीं तुलसी प्रजापति के बारे में कहा गया कि वे एक मुठभेड़ में मारे गए लेकिन इसके बारे में कई तरह के सवाल उठे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने इस साल की शुरुआत में इस पूरे मामले की जाँच सीबीआई को सौंपी थी.

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार को नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री अमित शाह के अलावा कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और दो बैंक अधिकारियों सहित 15 लोगों के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दाख़िल किया है और गंभीर आरोप लगाए हैं.

सीबीआई ने दो सिपाहियों और एक इंस्पेक्टर को इस मामले से मुक्त करते हुए उनके नाम आरोप पत्र से हटा लिए हैं.

क़ानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आरोप पत्र दाख़िल होने के बाद सीबीआई द्वारा अमित शाह की गिरफ़्तारी की संभावना बढ़ जाती है क्योंकि उनकी अग्रिम ज़मानत याचिका भी ख़ारिज हो चुकी है.

इससे पहले सीबीआई ने दो बार अमित शाह को पूछताछ के लिए तलब किया था लेकिन वे पेश नहीं हुए थे.

'पहले नागरिक फिर मंत्री'

इससे पहले गुजरात सरकार के मंत्री और प्रवक्ता जयनारायण व्यास ने बीबीसी संवाददाता अनुराधा प्रीतम के साथ बातचीत में अमित शाह का बचाव करने की कोशिश की थी.

Image caption अमित शाह की अग्रिम ज़मानत याचिक शुक्रवार को एक अदालत में ख़ारिज हो गई थी

जब उनसे अमित शाह के सीबीआई के सामने न पेश होने के बारे में पूछा गया तो व्यास का कहना था, "मुझे इस शब्द का प्रयोग कि सीबीआई अमित शाह को ढूँढ रही है, ग़लत लगता है. वे ख़ुद सीबीआई के सामने पेश नहीं हुए लेकिन उन्होंने अपने वकील को भेजा था. आदमी ख़ुद न्याय प्रक्रिया में शामिल हो सकता है या फिर अपने वकील को भेज सकता है."

जब उनसे बार-बार पूछा गया कि अमित शाह ख़ुद कहाँ हैं, तो उन्होंने सीधा जवाब देने से बचने का प्रयास किया.

शुक्रवार को बीबीसी से बातचीत के दौरान गुजरात सरकार के प्रवक्ता जयनारायण व्यास बोले, "कोई भी व्यक्ति पहले नागरिक है और फिर गृह मंत्री है. जो नागरिक के मौलिक अधिकार हैं, उनके तहत जो क़ानूनी प्रक्रिया करने की ज़रूरत है, अमित शाह वो कर रहे होंगे. तरीक़े अलग-अलग हो सकते हैं. अनुपस्थिति की वजह – ये उनका स्वतंत्र निर्णय हो सकता है. यदि व्यक्तिगत हैसियत से मुझे उनसे बात करने की ज़रूरत होगी तो मैं संपर्क कर लूँगा."

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