बर्मा के सैन्य शासक की भारत यात्रा

जनरल थान स्वे
Image caption बर्मा में कुछ ही दिनों बाद लोकतांत्रिक चुनाव होने वाले हैं.

बर्मा के सैन्य शासक जनरल थान स्वे 25 जुलाई से भारत की पाँच दिवसीय यात्रा पर आ रहे हैं. इस यात्रा के दौरान उनकी मुलाक़ात देश के वरिष्ठ नेताओं से होगी.

स्वे अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मिलेंगे और कई सूचना प्रौद्योगिकी परियोजनाओं का भी दौरा करेंगे.

पिछले एक दशक में भारत और बर्मा के बीच उच्च स्तरीय मुलाक़ातें हुई हैं. ये मुलाक़ात ऐसे समय में हो रही है जब पिछले 20 वर्ष में पहली बार बर्मा में संसदीय चुनाव होने वाले हैं.

दिल्ली में बर्मा की निर्वासित सरकार के प्रतिनिधि डॉ टिंट स्वे कहते हैं, ‘‘विश्व इस बात को नहीं समझ रहा है कि बर्मा की सेना को लोकतंत्र, तानाशाही और कम्युनिस्ट देशों से कोई गुरेज़ नहीं है. वो हर स्थिति के लिए तैयार रहते हैं.’’

स्वे भारतीय प्रधानमंत्री से मिलने के बाद हैदराबाद जाएंगे जहां वो सूचना प्रौद्योगिकी और फॉर्मास्युटिकल उद्योग के बारे में जानकारी जुटाएंगे.

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि इस यात्रा के दौरान बर्मा के चुनावों पर बात नहीं होगी. विदेश मंत्रालय में बर्मा डेस्क पर काम करने वाले एक अधिकारी का कहना है कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार और व्यवसाय के मौकों पर बातचीत होगी.

भारत कई बरसों से बर्मा से आग्रह करता रहा है कि वो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय चरमपंथी गुटों के ख़िलाफ कार्रवाई करे. पूर्वोत्तर के कई चरमपंथी गुट बर्मा से अपनी कार्रवाई चलाते रहे हैं.

कुछ विशेषज्ञ बर्मा और भारत के बीच तेल एवं गैस संबंधों का हवाला देते हुए कहते हैं कि भारत चाहता है कि बर्मा अपने अराकान प्रांत के तेल एवं गैस भंडारों से भारत को गैस दे.

फिलहाल बर्मा के अराकान गैस भंडारों से पूरा गैस चीन को जाता है.

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