गोमुख में ग्लेशियर टूटने से भारी नुक़सान

गोमुख (फ़ाइल फ़ोटो)

उत्तराखंड में गंगा के उदगम गोमुख के पास बादल फटने के बाद ग्लेशियर टूटने से भारी नुक़सान की ख़बर है.

दो कांवड़ियों की मौत हो गई है और आशंका जाहिर की जा रही है कि कई और कांवड़िये गंगा भागीरथी के तेज बहाव की चपेट में आ गए हैं.

घटनास्थल के पास वन विभाग का पुल भी टूट गया है जिससे गोमुख का संपर्क टूट गया है और दोनों ओर तीर्थयात्री और सैलानी फंस गए हैं.

सरकार ने गोमुख जाने पर फौरन रोक लगा दी है और वहां जाने के लिए जारी किए गए सभी परमिट रद्द कर दिए हैं.

ये घटना उत्तरकाशी से करीब 25 किमी दूर देवीगाड़ के पास हुई है. अधिकारी मौक़े पर पंहुच गए हैं और राहत और बचाव कार्य जारी हैं.

आपदा प्रबंधन और समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने बीबीसी से बातचीत में कहा,''स्थिति गंभीर है,पानी का उफान इतना तेज है कि राहत औऱ बचाव कार्य में भी बहुत दिक्कत आ रही है. हम पता लगा रहे हैं कि कितने लोग कहां फंसे हुए हैं.''

उन्होंने बताया,''सरकार ने गोमुख जाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. यात्रियों की सुरक्षा के लिए गोमुख जाने के लिए कांवड़ियों को जारी किए गए सभी परमिट रद्द कर दिए गए हैं.''

प्रमुख तीर्थ

गंगोत्री का मंदिर लोकप्रिय चार धाम तीर्थयात्रा का एक प्रमुख तीर्थ है. गंगा का उदगम गोमुख यहां से करीब 19 किमी दूर है.

पिछले कुछ वर्षों में यहां कांवड़ यात्रा प्रचलित हुई है. हजारों लोग कांवड़ लेकर पैदल गोमुख जाते हैं और वहां से जल लेकर लौटकर अपने गांव-शहर के शिवालयों में चढ़ाते हैं.

लेकिन कांवड़ियों के बढ़ते दबाव और उनकी गतिविधि से हो रहे प्रदूषण के कारण सीमित संख्या में ही लोगों को वहां जाने की अनुमति दी जाती है.

इसके लिए परमिट व्यवस्था है जिसके तहत हर दिन 150 लोगों को वहां जाने के लिए परमिट जारी किया जाता है.

अब प्रशासन के परमिट निरस्त कर दिये जाने से वहां अफ़रातफ़री का माहौल है.

गंगोत्री और उत्तरकाशी क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहे नदी बचाओ आंदोलन के संयोजक रवि चोपड़ा का कहना है,''दरअसल ये प्राकृतिक आपदाएं हमारी ही आमंत्रित की हुई हैं और इस पूरे क्षेत्र की संवेदनशीलता को समझे बगैर ही वहां बांध भी बन रहे हैं और गोमुख में लोगों की भीड़ भी बढ़ रही है.''

उत्तराखंड में गढ़वाल और कुमाऊं के दोनों ही मंडलों में पिछले एक सप्ताह से भारी बारिश हो रही है जिससे जगह-जगह से भूस्खलन और नदियों में उफान की घटनाएं सामने आ रही हैं.

पिछले एक सप्ताह में इस तरह की घटनाओं में छह लोगों की मौत हो गई है, कई जगह पुल और रास्ते टूट गए हैं और लाखों का नुक़सान हुआ है.

तीर्थनगरी हरिद्वार में गंगा ख़तरे के निशान के क़रीब बह रही है और वहां सरकारी गोदाम में पानी भरने से तीन हज़ार क्विंटल चावल बहने की सूचना है.

इस बीच चमोली जिले में भी भूस्खलन से दिल्ली-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के भी बंद होने की सूचना है जिससे वहां भी सैकड़ों लोग दोनों ओर फंस गए हैं.

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