'ज़िंदा होती तो सानिया जैसी होती'

Image caption रूचिका के साथ टेनिस खेलने वाली आराधना का कहना है कि वो अब टेनिस कोर्ट पर जाने की कल्पना भी नहीं कर पातीं.

तैंतींस वर्ष की आराधना पिछले कुछ वर्षों से ऑस्ट्रेलिया में अपने पति और दो बच्चों के साथ रहती हैं. लेकिन जब भी उनकी दोस्त रुचिका गिरहोत्रा से जुड़े क़ानूनी मुक़दमों के लिए ज़रूरत पड़ी है वे सब छोड़ भारत चली आती हैं.

रुचिका से छेड़छाड़ और आत्महत्या मामले में मई 2010 में अदालत ने पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपीएस राठौर की सज़ा को छह महीने से बढ़ाकर डेढ़ साल करने का आदेश दिया था.

बीस साल चली इस क़ानूनी लड़ाई में रुचिका की मौत के बाद भी आराधना ने उसका साथ नहीं छोड़ा है.

दोनों की दोस्ती की कहानी पंचकुला में 1989 में शुरु हुई. रुचिका और आराधना दोनों के मन में टेनिस खिलाड़ी बनने का सपना था और टेनिस कोर्ट पर ही दोनों दोस्त बनीं.

उन दिनों को याद करते हुए आराधना बताती हैं, "हमारा ज़्यादातर वक़्त टेनिस कोर्ट पर ही बीतता था. वो हरियाणा लॉन टेनिस एसोसिएशन की सबसे अच्छी खिलाड़ी थी. उनकी माँ का एक साल पहले ही निधन हुआ था लेकिन उन्हें देखकर ये कहना मुश्किल था. माँ न होने के कारण वो घर का सारा काम करती थीं.रुचिका की सबसे अच्छी बात थी कि वो बहुत ज़िंदादिल और बहादुर थी. हमेशा हँसती रहती थी. उसके दिल में प्यार और आँखों में टेनिस के सपने थे"

आराधना कहती हैं कि रुचिका की हँसती खेलती ज़िंदगी उस समय बदल गई जब अगस्त 1990 में उसके साथ छेड़छाड़ की घटना हुई.

वो कहती हैं, "मैं उस घटना की गवाह थी. लेकिन दो दिन तक तो हम किसी को बता भी नहीं पाए. लेकिन उस बात को उठाना ज़रूरी था. रुचिका ने आख़िरकर मेरी माँ को बताया और हम सब ने मिलकर राठौर के ख़िलाफ़ रुचिका के लिए लड़ने का फ़ैसला किया."

दोस्ती की दास्तां

Image caption रूचिका गिरहोत्रा

आराधना की मानें तो इस क़िस्से ने दो छोटी बच्चियों की दुनिया उलट-पुलट करके रख दी.

कहती हैं, "मैं 13 साल की थी और रुचिका 14 साल की. हमारी उम्र में जहाँ लड़कियाँ घूमने फिरने, लड़कों, फ़िल्मों की बातें करती थीं हम कोर्ट कचहरी, वकीलों की बात करते थे."

रुचिका के साथ छेड़छाड़ का आरोप उस समय महानिरीक्षक रहे एसपीएस राठौर पर था जो पंचकुला में हरियाणा लॉन टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष भी थे. इस घटना के तीन साल बाद अगस्त, 1993 में रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी जिस बारे में अदालत में मुकदमा चल रहा है.

रुचिका ने तो दुनिया से विदा ले ली लेकिन आराधना और उनके माता-पिता ने छेड़छाड़ मामले में मुकदमा लड़ने का फ़ैसला किया. आराधना बताती हैं है कि इन 20 सालों में उन्हें और उनके परिवार को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा और उनकी निजी ज़िंदगी पर भी गहरा असर पड़ा.

वे कहती हैं, "हम जब अदालत जाते तो कई रूट बदल कर गाड़ियाँ बदल कर जाते. रुचिका के साथ जो हुआ इसे देखने के बाद मुझे गहरा मानसिक धक्का लगा. मैं फिर कभी अपने से बड़ी उम्र के लोगों पर यकीन नहीं कर पाई. किसी लड़के से रिश्ता बनाने में दिक्कत होती थी."

आराधना कहती हैं, "शादी के समय अपने पति को मैने बताया था कि मैं रुचिका के मामले से जुड़ी हूँ. शुरु में मुझे अपने ससुराल वालों और पति के कई सवालों के जवाब देने पड़े. उन्हें मेरी सुरक्षा की चिंता थी. लेकिन बाद में वे भी मेरे समर्थन में आ गए. और वैसे भी जब आपको पता हो कि आपका लक्ष्य क्या है तो कोई बाधा आपको रोक नहीं सकती."

अपनी दोस्त रुचिका को याद करते हुए कहती हैं, "टेनिस खिलाड़ी बनने का सपना देखने वाली रुचिका अगर ज़िंदा होती तो शायद सानिया मिर्ज़ा की तरह भारत के लिए खेल रही होती. उसका बैकहैंड बहुत अच्छा था."

आराधना भी रुचिका के साथ टेनिस खेला करती थी लेकिन आज वो टेनिस कोर्ट में जाने की कल्पना भी नहीं कर सकती.

कहती हैं, "टेनिस कोर्ट पर हमने साथ बहुत वक़्त बिताया. रुचिका की मौत के बाद मैने कई बार टेनिस खेलने की कोशिश की, लेकिन हिम्मत नहीं हुई, शादी के बाद मेरे पति ने भी कोशिश की. पर ये बहुत तकलीफ़देह है. मुझे ऐसा लगता है कि कोर्ट के दूसरी ओर से रुचिका सर्व कर रही है और मुझे बॉल उठानी है. टेनिस तो अब हमेशा के लिए छूट गया है."

राठौड़ को इस साल अदालत ने रुचिका के साथ छेड़छाड़ मामले में डेढ़ साल की सज़ा सुनाई है. आराधना कहती हैं कि रुचिका बहुत जीवट वाली बच्ची थी और ये फ़ैसला उनकी दोस्त को सच्ची श्रद्धाजंलि है.

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