कश्मीर में तनाव, चार मरे

कश्मीर में लोगों का विरोध प्रदर्शन

भारत प्रशासित कश्मीर में सोमवार को पुलिस फ़ायरिंग में चार लोगों की मौत हो गई है और कई लोग घायल हैं.

कश्मीर घाटी के अधिकांश हिस्सों में सोमवार को कर्फ़्यू जारी है. तनाव के बीच अधिकांश जगहों पर लोग कर्फ़्यू का उल्लंघन करते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

ग़ौरतलब है कि रविवार को सुरक्षाबलों और स्थानीय लोगों के बीच झड़प में नौ लोगों की मौत हो गई थी.

उधर दो दिन पहले बीजबेहरा में घायल हुए तारिक अहमद नामक व्यक्ति की सोमवार को अस्पताल में मौत हो गई.

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रविवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति की बैठक आयोजित की जिसमें कश्मीर घाटी की स्थिति की समीक्षा की गई.

एक महीने में ये दूसरा मौक़ा है जब कैबिनेट में कश्मीर घाटी की स्थिति पर विचार विमर्श किया गया.

अधिकारियों का कहना है कि रविवार को कश्मीर के एक थाने में आग लगने के बाद हुए विस्फोट में चार लोगों की मौत हो गई और इसमें 20 अन्य घायल हुए हैं.

रविवार शाम के समय खरिवू के लोगों ने एक पुलिस स्टेशन में आग लगा दी थी. आग लगने के बाद थाने में रखे विस्फोटकों में धमाका हुआ जिसमें चार लोगों की मौत हो गई.

हालांकि स्थानीय लोगों का दावा है कि इस धमाके में पाँच लोगों की मौत हुई थी.

सुरक्षाबलों से संघर्ष

इससे पहले पांपोर में प्रदर्शन कर रहे लोगों और पुलिस बलों के बीच संघर्ष में चार प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी और कई घायल हो गए थे.

श्रीनगर से 13 किलोमीटर दूर पांपोर कस्बे में सैकड़ों लोगों ने भारत सरकार के विरोध में प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने सीआरपीएफ़ के जवानों पर पत्थर फेंके जिसके बाद पुलिस बलों ने उन पर गोलियां चलाईं. इसमें दो लोगों की मौत हो गई.

जब इन दो लोगों के शव को ले जाया जा रहा था, तब पुलिस ने फिर से गोलियां चलाईं. इसमें एक महिला के सिर में गोली लगी और अस्पताल ले जाते हुए उसकी मौत हो गई.

प्रदर्शनों के दौरान घायल एक अन्य व्यक्ति की मौत भी अस्पताल में हुई.

बिगड़ते हालात

कश्मीर घाटी में पिछले एक महीने से कर्फ़्यू लगा हुआ है. इस दौरान बीच में सिर्फ़ तीन बार कर्फ़्यू हटाया गया.

पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों के ऊपर जून से लेकर अब तक की गई फायरिंग में 27 लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं. मारे गए लोगों में अधिकतर नवयुवक हैं.

जून के मध्य से ही पुलिस की गोलीबारी में हुई कई मौतों के कारण कश्मीर घाटी में जनजीवन अस्तव्यस्त है.

अलगाववादी गुटों के आह्वान पर पिछले एक महीने से कश्मीर घाटी में आए दिन बंद चल रहा है और उमर अब्दुल्ला के नेतृत्ववाली राज्य सरकार को समझ में नहीं आ रहा है कि स्थिति से कैसे निबटा जाए.

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