संसद में बाधा पहुँची 14207 बार

  • 3 अगस्त 2010
लोकसभा
Image caption लोकसभा में प्रश्न काल के दौरान सांसदों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगता रहा है

एक अध्ययन के मुताबिक पंद्रहवीं लोकसभा में 2009-10 के दौरान लोकसभा की कार्यवाही 14207 बार बाधित हुई और सदन की कार्यवाही 102 बार स्थगित करनी पड़ी.

एक ग़ैर सरकारी संगठन 'मास फ़ॉर अवेयरनेस' की इस रिपोर्ट में लोकसभा के सासंदों के साल भर के काम-काज का लेखा-जोखा दिया गया है.

इस रिपोर्ट को नीरज गुप्ता ने संपादित किया है.

देश की सबसे बड़ी पंचायत में सांसदों की उपस्थिति, उनके काम-काज का लेखा-जोखा आम तौर पर हमारे सामने नहीं आता. हमारे सांसदों की छवि जो आम लोगों के मन में जो है उसे यह अध्ययन पुख़्ता ही करती है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा के सत्र के दौरान 86 बैठकों में महज सात सांसदों की सौ फीसदी उपस्थिति रही, जबकि क़रीब 100 सांसदों की उपस्थित 90 फीसदी से ज्यादा रही.

हालांकि आम राय के विपरीत सांसदों का प्रदर्शन प्रश्नकाल के दौरान ठीक रहा. जहाँ 27 सांसदों ने 200 से ज्यादा सवाल पूछे वहीं 100 से अधिक सवाल पूछने वाले सांसदों की संख्या 100 से ज्यादा है.

कुछ सांसद मौन रहे...

प्रश्न पूछने के मामले में महाराष्ट्र के सांसद सबसे आगे रहे जबकि पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा सहित क़रीब 100 सांसदों ने संसद में मौन रहना उचित समझा.

लोकसभा की कार्यवाही चर्चित महिला आरक्षण बिल, आईपीएल विवाद और महंगाई जैसे मुद्दों पर बहस के दौरान सबसे ज्यादा बाधित हुई. समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव और उन्हीं की पार्टी के एक अन्य सांसद शैलेंद्र कुमार लोकसभा में व्यवधान उत्पन्न करने में सबसे आगे रहे.

एक तरफ़ जहाँ सासंदों की मांग 'सांसद विकास निधि' को बढ़ाने की है, वहीं इस रिपोर्ट का कहना है कि आधे से ज्यादा सांसदों ने ठीक ढंग से अपने फंड के पैसों का इस्तेमाल ही नहीं किया.

राज्यों के लिए उपलब्ध आँकड़े पर नज़र डालने पर पता चलता है कि सांसद विकास निधि का ठीक ढंग से इस्तेमाल करने में मिजो़रम सबसे आगे रहा.

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